ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालिबफ ने अमेरिका को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि वह अपने बयानों को लेकर सावधान रहे। गालिबफ ने साफ कर दिया कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
👉: India: NEET परीक्षा पेपर लीक मामले में Telegram पर लगा बैन, दुबई स्थित कंपनी के सामने बड़ी चुनौती।
ट्रंप की धमकी और ईरान का पलटवार
यह पूरा विवाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों के बाद शुरू हुआ। राष्ट्रपति ट्रंप ने हिजबुल्लाह को समर्थन देने के लिए ईरान पर हमला करने की धमकी दी थी। ट्रंप ने Truth Social पर पोस्ट कर कहा था कि अगर ईरान ने परेशानी पैदा करना जारी रखा, तो वह उन पर फिर से बहुत बड़ा हमला करेंगे। इस पर जवाब देते हुए गालिबफ ने कहा कि ईरान अमेरिकी धमकियों को अहमियत नहीं देता और वे खुद कार्रवाई करने में यकीन रखते हैं।
स्विट्जरलैंड में उच्च स्तरीय बातचीत
तनाव के बीच 21 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू हुई। इस बैठक में ईरान की तरफ से मोहम्मद बागर गालिबफ और अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति JD Vance ने हिस्सा लिया। इस मुश्किल बातचीत में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर और कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमन मध्यस्थ के रूप में मदद कर रहे थे।
बातचीत में कड़वाहट और जलडमरूमध्य की बंदी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत का माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी टीम के साथ हाथ मिलाने और फोटो खिंचवाने से साफ मना कर दिया। वहीं, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने Strait of Hormuz को बंद करने का ऐलान कर दिया। ईरान का आरोप है कि इसराइल ने लेबनान में युद्धविराम के नियमों का उल्लंघन किया है।
आगे क्या होगा
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत का पहला दौर लगभग 80 मिनट तक चला। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप के कड़े बयानों की वजह से अब इस बातचीत के जारी रहने पर संदेह जताया जा रहा है। ईरान ने अपनी शर्त रखी है कि जब तक लेबनान में लड़ाई खत्म करने का इंतजाम नहीं होता, तब तक अन्य मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं की जाएगी।
