ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव काफी बढ़ गया है। हाल ही में अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद हालात गंभीर हो गए हैं। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका को आगाह किया है कि वह कोई भी गलत कदम न उठाए और इस तनाव को और न बढ़ाए।
समझौता टूटा और शुरू हुई जंग
पाकिस्तान ने 17 जून को ईरान और अमेरिका के बीच शांति के लिए एक समझौता कराया था, जिसे Islamabad Memorandum of Understanding कहा गया। इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच लड़ाई को रोकना था। लेकिन 8 जुलाई 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस समझौते को खत्म कर दिया। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने जानबूझकर संधि तोड़ी है और वह युद्ध को बढ़ावा दे रहा है। विदेश मंत्री Araghchi ने साफ किया कि ईरान अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
हमलों का सिलसिला
पिछले दो दिनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले किए। इसकी शुरुआत तब हुई जब ईरान ने Strait of Hormuz में तीन व्यापारिक जहाजों पर हमला किया। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के उत्तरी हिस्से में एक महत्वपूर्ण रेल पुल और इराक में स्थित एक कैंप पर ड्रोन हमला किया।
ईरान ने भी पलटवार करते हुए जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य बेस पर 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसके अलावा कुछ अन्य खाड़ी देशों पर भी हमले किए गए, लेकिन ज्यादातर मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही रोक लिया गया।
खाड़ी देशों और तेल व्यापार पर असर
इस बढ़ते तनाव की वजह से Strait of Hormuz से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है, जिससे दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। विदेश मंत्री Araghchi ने ओमान और तुर्की के विदेश मंत्रियों से भी फोन पर बात की है ताकि बातचीत के जरिए इस स्थिति को संभाला जा सके। पाकिस्तान के आर्मी चीफ Field Marshal Asim Munir से भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई, हालांकि पाकिस्तान सरकार या सेना की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
