अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने अपने हमले बंद नहीं किए, तो वह दोनों देशों के बीच हुए समझौते का पालन करना छोड़ देगा। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को पूरी तरह खत्म घोषित कर दिया है, जिससे इलाके में युद्ध का खतरा बढ़ गया है।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत आमिर सईद इरावानी ने 11 जुलाई 2026 को कहा कि अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के नियमों का खुला उल्लंघन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 7 और 8 जुलाई को अमेरिका ने ईरान के द्वीपों और दक्षिणी शहरों पर हमले किए। इरावानी ने साफ किया कि ईरान समझौते का सम्मान तभी करेगा जब अमेरिका भी अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और बारूदी सुरंगों को हटाने का काम सिर्फ ईरान के अधिकार में है।
दूसरी तरफ, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने माना है कि उन्होंने 7 और 8 जुलाई को ईरान में करीब 80 सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की 60 से ज्यादा छोटी नावें शामिल थीं। अमेरिका का कहना है कि ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तीन व्यापारिक जहाजों पर हमला किया था, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई।
इस विवाद के बीच जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। अमेरिकी हमलों में ईरान का एक सैनिक मारा गया, जबकि 8 जुलाई को एक अमेरिकी मिसाइल गलती से एक स्कूल पर गिर गई, जिससे करीब 200 लोग हताहत हुए। इसके जवाब में ईरान के IRGC ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए।
इन घटनाओं के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 11 जुलाई को ऐलान किया कि ईरान के साथ हुआ समझौता अब खत्म हो चुका है। हालांकि, उन्होंने बातचीत के दरवाजे खुले रखे हैं। अमेरिकी अधिकारी अब ईरान पर दबाव बना रहे हैं कि वह सार्वजनिक तौर पर माने कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य सबके लिए खुला है और व्यापारिक जहाजों पर हमले बंद करे।
बता दें कि 18 जून 2026 को ‘इस्लामाबाद समझौता’ हुआ था, जिसका मकसद संघर्ष को खत्म करना और समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखना था। इस समझौते के तहत अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई न करने का वादा किया था।
ईरान ने इस पूरे मामले की शिकायत 9 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासचिव से की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंध इस समझौते का उल्लंघन हैं। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने जानकारी दी कि फरवरी में हुए हमलों के कारण ईरान के परमाणु कार्यक्रम की सटीक जानकारी अब उनके पास नहीं है। इस पूरे विवाद में रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका और पश्चिमी देशों का विरोध किया है।
