ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ओमान के विदेश मंत्री बदर बिन हमद अलबुसाइडी से फोन पर बात की। यह बातचीत मुख्य रूप से युद्धविराम और दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत को बचाने के लिए हुई, क्योंकि अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है।

इस्लामाबाद में क्यों नहीं बनी बात?

ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में लंबी बातचीत हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। अमेरिका ने मांग की थी कि ईरान 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन न करे और अपने स्टॉक को हटाए। वहीं ईरान ने इस समय सीमा को बहुत कम रखने की बात कही। ईरान के मंत्री अराघची ने अमेरिका पर अपनी शर्तें थोपने और नाकेबंदी करने का आरोप लगाया।

नाकेबंदी और जहाजों पर क्या असर हुआ?

अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों की नाकेबंदी शुरू कर दी है। इसकी वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास कम से कम दो बड़े तेल टैंकरों को अपना रास्ता बदलना पड़ा। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि अगर कोई भी सैन्य जहाज इस इलाके में आया, तो इसे युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा।

दुनिया के बड़े नेताओं ने क्या कहा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान डील चाहता है, लेकिन वह अपने परमाणु इरादों को नहीं छोड़ रहा। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका की नाकेबंदी का पूरा समर्थन किया। वहीं चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान से बात करते हुए कहा कि इस लड़ाई को फिर से शुरू होने से रोकना बहुत ज़रूरी है।

Sushma Kumari

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