ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान ने गुपचुप तरीके से माना है कि उसके कुछ कट्टरपंथी गुट ने व्यावसायिक जहाजों पर हमला किया था। इस घटना के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई की और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर समझौते को खत्म करने का ऐलान कर दिया है।
जहाजों पर हमले और ईरान की स्वीकारोक्ति
सीबीएस न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, 11 जुलाई 2026 को अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ईरान ने निजी तौर पर स्वीकार किया है कि उसके कुछ कट्टरपंथियों ने व्यावसायिक जहाजों पर फायरिंग की थी। यह हमला सऊदी अरब और कतर के तीन टैंकर जहाजों पर हुआ था। ईरान के अधिकारियों ने अमेरिका से कहा कि उनसे गलती हुई है और बातचीत जारी रखनी चाहिए। माना जा रहा है कि ईरान के अंदर नरम दल और कट्टरपंथियों के बीच सत्ता की खींचतान चल रही है।
सीजफायर समझौता और ट्रंप की चेतावनी
जून 2026 के मध्य में दोनों देशों के बीच एक समझौता (MoU) हुआ था। इसके तहत ईरान को 60 दिनों तक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को बिना किसी शुल्क के सुरक्षित रास्ता देना था। बदले में अमेरिका ने नए प्रतिबंध न लगाने और अतिरिक्त सेना न भेजने का वादा किया था। लेकिन जहाजों पर हमले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 11 जुलाई को इस समझौते को खत्म करने की घोषणा कर दी। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि अगर उनके जीवन पर कोई खतरा आया तो वह ईरान को पूरी तरह तबाह कर देंगे।
ईरान के अलग-अलग दावे
एक तरफ जहाँ ईरान ने निजी तौर पर गलती मानी, वहीं उसके विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि ईरान ने अपना वादा निभाया है। उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने समझौते के पैराग्राफ 9 का उल्लंघन करते हुए नए प्रतिबंध लगाए हैं। अराघची जल्द ही ओमान जाएंगे जहाँ वह अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे।
दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने साफ कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सारी गतिविधियाँ केवल ईरान के नियंत्रण में हैं। कट्टरपंथी नेता अली खुमेनी ने शांति की बात करने वालों को गद्दार बताया है। वहीं, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने अमेरिका पर विदेशी नीति में धोखाधड़ी और दादागिरी करने का आरोप लगाया है।
