Iran US Tension: ईरान ने अमेरिका पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप, Strait of Hormuz बंद होने से बढ़ी टेंशन
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. ईरान ने अमेरिका पर अपने वादों को तोड़ने और कूटनीति के साथ धोखा करने का गंभीर आरोप लगाया है. इस विवाद के कारण Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को लेकर टकराव बढ़ गया है, जिससे पूरी दुनिया की नजरें अब इस क्षेत्र पर टिकी हैं.
Strait of Hormuz और ईरान का क्या कहना है?
ईरान के संसदीय स्पीकर Mohammed Bagher Qalibaf ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका की नाकेबंदी (blockade) जारी रहेगी, तब तक Strait of Hormuz से जहाजों का गुजरना मुमकिन नहीं होगा. उन्होंने कहा कि यह नामुमकिन है कि दूसरे जहाज वहां से निकलें जबकि ईरान के अपने जहाज न जा सकें. वहीं, ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने अमेरिकी नाकेबंदी को युद्धविराम का उल्लंघन बताया है और कहा है कि वे ट्रैफिक पर अपना नियंत्रण बनाए रखेंगे.
अमेरिका की चेतावनी और बातचीत की कोशिश
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने घोषणा की है कि उनके वार्ताकार 20 अप्रैल को पाकिस्तान जाएंगे ताकि ईरान के साथ बातचीत की जा सके. हालांकि, Trump ने ईरान पर युद्धविराम का पूरी तरह उल्लंघन करने का आरोप लगाया है क्योंकि ईरानी बलों ने जहाजों पर फायरिंग की है. उन्होंने धमकी दी है कि अगर डील मंजूर नहीं हुई, तो वह ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे को तबाह कर देंगे. अमेरिका ने साफ किया है कि उसकी नौसेना की नाकेबंदी पूरी तरह जारी रहेगी.
विवाद के मुख्य बिंदु और मौजूदा स्थिति
दोनों देशों के बीच भरोसे की भारी कमी है और उनकी शर्तें एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं. जहां ईरान अपनी संपत्ति और नाकेबंदी हटाने की मांग कर रहा है, वहीं अमेरिका परमाणु कार्यक्रम को रोकने पर अड़ा है. इस पूरे विवाद की मुख्य बातें नीचे दी गई टेबल में समझें:
| विषय | विवरण |
|---|---|
| ईरान की मांग | नाकेबंदी खत्म करना, जमी हुई संपत्ति वापस पाना और हमले न करने की गारंटी |
| अमेरिका की मांग | यूरेनियम संवर्धन (enrichment) बंद करना और परमाणु सुविधाओं को हटाना |
| अमेरिकी टीम | JD Vance, Steve Witkoff और Jared Kushner |
| बातचीत की जगह | पाकिस्तान (इस्लामाबाद) |
| ताजा घटना | 18 अप्रैल को दो जहाजों पर हमले हुए और 23 जहाज अमेरिकी आदेश पर वापस मुड़े |
| ईरान का रुख | वॉशिंगटन की मांगों को बहुत ज्यादा और अवास्तविक बताकर बातचीत से इनकार किया |