अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई शांति बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। इस बैठक में 21 घंटे तक चर्चा हुई लेकिन दोनों देश किसी एक बात पर सहमत नहीं हो पाए। इसके तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है, जिसके बाद ईरान ने अमेरिका को युद्ध की चेतावनी दी है।

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क्यों टूटी अमेरिका और ईरान की बातचीत

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने बताया कि ईरान अमेरिका की ‘रेड लाइन्स’ यानी बुनियादी शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं था। अमेरिका की मुख्य शर्त यह थी कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश पूरी तरह बंद करे और उन टूल्स को भी छोड़ दे जिनसे परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं। वहीं ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर कलीबाफ ने कहा कि ईरान ने भविष्य को लेकर कई प्रस्ताव रखे थे, लेकिन अमेरिका विश्वास जीतने में नाकाम रहा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव और नाकेबंदी का फैसला

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी नौसेना तुरंत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी करेगी ताकि जहाजों का आना-जाना रोका जा सके। उन्होंने साफ किया कि जहाजों के सुरक्षित निकलने के मामले में कोई समझौता नहीं होगा। दूसरी तरफ ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि किसी भी सैन्य जहाज के करीब आने पर उसका कठोरता से जवाब दिया जाएगा। अमेरिका ने दावा किया है कि उसके दो डिस्ट्रॉयर जहाज वहां माइन हटाने का काम कर रहे हैं, हालांकि ईरान ने इस बात से इनकार किया है।

अमेरिका की शर्तें और ईरान की मांगें

अमेरिका की शर्तें (Red Lines) ईरान की मांगें
यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करना जमी हुई संपत्ति वापस मिलना
परमाणु सुविधाओं को खत्म करना सभी प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंध हटाना
हमास, हिजबुल्लाह और हूतियों को फंडिंग रोकना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण रहना
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बिना टोल के पूरी तरह खोलना शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन का अधिकार
क्षेत्रीय शांति के लिए व्यापक ढांचा बनाना लेबनान पर इजरायली हमलों का अंत