ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बहुत बढ़ गया है। ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर काज़ेम घरिबबादी ने बुधवार को साफ़ कहा कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से उनकी अपनी भाषा में बात करनी होगी। उन्होंने कहा कि ट्रंप ‘ताकत की भाषा’ को सबसे बेहतर समझते हैं।

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यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐलान किया कि ईरान के साथ हुआ युद्धविराम अब खत्म हो गया है। ट्रंप ने ईरान की आम नागरिक सुविधाओं पर और हमले करने की धमकी भी दी। इससे पहले अमेरिका ने ईरान पर हमले किए थे क्योंकि ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागे।

ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार मोजतबा खामेनी ने चेतावनी दी कि अमेरिका द्वारा समझौते को खत्म करने के फैसले से पूरा क्षेत्र आग की चपेट में आ सकता है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी खजाने विभाग द्वारा तेल बिक्री पर प्रतिबंध हटाने के फैसले की निंदा की है। ईरान ने इसे इस्लामाबाद समझौते का उल्लंघन बताया और पड़ोसी देशों को चेतावनी दी है कि वे अपनी ज़मीन का इस्तेमाल अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए न करने दें।

ईरान की सुरक्षा परिषद के सचिव मोहम्मद बाकर ज़ोलकाद्र ने कहा कि ईरानी लोग धमकियों को नहीं समझते। उन्होंने ट्रंप से ईरानी लोगों का सम्मान करने को कहा और चेतावनी दी कि वरना उन्हें दूसरी भाषा में जवाब मिलेगा। विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने भी यह साफ़ कर दिया कि जब तक अमेरिकी धमकियाँ जारी रहेंगी, अंतिम समझौते के लिए बातचीत शुरू नहीं होगी।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.