ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। हालांकि दोनों देशों के बीच सीज़फायर लागू है, लेकिन ईरान की सेना अब युद्ध की तैयारी में जुट गई है। अमेरिका ने सीज़फायर की समय सीमा तो बढ़ा दी है, लेकिन समुद्र में ईरान के जहाज़ों को रोकना जारी रखा है।
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सीज़फायर के बावजूद युद्ध की तैयारी और अमेरिका का रुख
ईरान के सेना प्रवक्ता ने कहा कि देश युद्ध की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है और अपने टारगेट बैंक को अपडेट कर लिया है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद सीज़फायर को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया है। ट्रंप ने साफ़ किया कि अमेरिका सीज़फायर तो रखेगा, लेकिन उनकी नौसेना ईरान की नाकाबंदी जारी रखेगी और किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए तैयार रहेगी।
बातचीत पर विवाद और जहाज़ों की जब्ती
ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Qalibaf ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह ईरान को जबरदस्ती बातचीत की मेज़ पर लाना चाहता है। उन्होंने कहा कि ईरान धमकियों के साये में बातचीत नहीं करेगा और युद्ध के मैदान में अपनी नई रणनीति अपनाएगा।
- ईरान का दावा है कि 13 अप्रैल से लागू अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी सीज़फायर का उल्लंघन है।
- अमेरिकी नौसेना ने हिंद महासागर में ईरान का एक कच्चा तेल ले जा रहा टैंकर जब्त किया।
- अरब सागर में भी ईरान के झंडे वाले एक जहाज़ को अमेरिकी सेना ने अपने कब्जे में लिया।
पाकिस्तान की कोशिशें और मौजूदा हालात
पाकिस्तान इस विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और फील्ड मार्शल Asim Munir दोनों देशों के बीच शांति वार्ता कराने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिका की नाकाबंदी और जहाज़ों की जब्ती के कारण ईरान अभी इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता में शामिल होने को तैयार नहीं है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका और ईरान के बीच सीज़फायर की क्या स्थिति है?
राष्ट्रपति ट्रंप ने सीज़फायर को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया है, लेकिन अमेरिकी नौसेना अभी भी समुद्र में ईरान के व्यापारिक जहाज़ों की नाकाबंदी कर रही है।
ईरान ने बातचीत करने से क्यों मना किया है?
ईरान का कहना है कि अमेरिका ने 13 अप्रैल से समुद्र में जो नाकाबंदी की है, वह युद्धविराम के नियमों के खिलाफ है और वह दबाव में आकर बातचीत नहीं करेगा।