ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। 16 जुलाई 2026 को अमेरिका ने लगातार छठे दिन ईरान के विभिन्न ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड CENTCOM ने बताया कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमता को कम करने और कमर्शियल शिपिंग पर हमलों को रोकने के लिए की गई है। इस दौरान ईरान के पोर्ट सिटी Bushehr को निशाना बनाया गया, जहां देश का इकलौता नागरिक परमाणु संयंत्र मौजूद है।
हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान की सेना ने Bahrain, Jordan और Kuwait को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन दागे। ईरान ने दावा किया कि उन्होंने इन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। कुवैत की सेना ने पुष्टि की कि उन्होंने अपने एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए दुश्मन के ड्रोन का मुकाबला किया, जबकि जॉर्डन की सेना ने ईरान द्वारा दागी गई आठ मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया।
दोनों देशों के बीच क्या है स्थिति
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने कहा कि राष्ट्रपति Trump ईरान की हरकतों को बर्दाश्त नहीं करेंगे और उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। वहीं, ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने उनके नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया, तो वे पूरे क्षेत्र के इन्फ्रास्ट्रक्चर को तबाह कर देंगे। इससे पहले IAEA ने भी चेतावनी दी थी कि परमाणु संयंत्र के पास हमले करना परमाणु सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक है। ईरान की तरफ से अमेरिका के साथ डील करने की इच्छा भी जताई गई है, लेकिन फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव कम होता नहीं दिख रहा है।
