खाड़ी देशों में एक बार फिर शांति की उम्मीदों को झटका लगा है। 12 जुलाई 2026 को ईरान की सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Abolfazl Akraminia ने मांग की है कि अमेरिका को इस्लामाबाद में हुए समझौते (MoU) की शर्तों का पालन करना चाहिए। यह बयान तब आया है जब अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर फिर से हमले शुरू कर दिए हैं।
समझौते का उल्लंघन और बढ़ता संघर्ष
जून के महीने में हुए इस्लामाबाद समझौते का उद्देश्य ईरान-अमेरिका युद्ध को खत्म करना था, जिसके तहत 60 दिनों का संघर्ष विराम तय किया गया था। लेकिन, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi का कहना है कि अमेरिका समझौते की धारा 9 का उल्लंघन कर रहा है, जो नए प्रतिबंध लगाने या और अधिक सेना तैनात करने से रोकता है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 11 जुलाई को सीजफायर को खत्म घोषित कर दिया है।
हमले और जवाबी कार्रवाई
अमेरिकी सेना ने 12 जुलाई को ईरान के लगभग 140 सैन्य ठिकानों पर हमले किए। यह कार्रवाई ओमान की खाड़ी में M/V GFS Galaxy जहाज पर हुए हमले के जवाब में की गई है। इसके जवाब में, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने ओमान के Duqm पोर्ट पर मौजूद अमेरिकी सैन्य लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। हालांकि तनाव चरम पर है, लेकिन ईरान के अधिकारी मशहद में चर्चा जारी रखने पर सहमत हुए हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस बढ़ते विवाद पर चिंता जताई है और क्षेत्र में शांति की अपील की है।
