खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। 18 जुलाई 2026 को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने धमकी दी कि खाड़ी के पानी में मौजूद अमेरिकी नौसेना के जहाज उनकी निगरानी में हैं और उन पर हमले का समय कभी भी आ सकता है। यह चेतावनी अमेरिका द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों और समुद्री निगरानी टावरों को नष्ट करने के बाद आई है।

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हमलों का सिलसिला और क्षेत्रीय तनाव

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने शुक्रवार को पुष्टि की कि उसने ईरान के चाबहार पोर्ट पर मौजूद उस टावर को तबाह कर दिया है, जिसका इस्तेमाल ईरान जहाजों को ट्रैक करने के लिए करता था। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन हमले की पुष्टि की है, जबकि जॉर्डन की सेना ने अपनी सीमा में दाखिल हुई 10 ईरानी मिसाइलों को मार गिराया। इसके साथ ही, ईरान ने ओमान में दो अमेरिकी रडार साइट्स पर भी हमले का दावा किया है।

प्रवासियों और व्यापार पर असर

इस संघर्ष की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाले व्यापार और समुद्री जहाजों की आवाजाही कम हो गई है। अमेरिकी सेना ने इस क्षेत्र में एक नौसैनिक नाकेबंदी लागू की है और वे संदिग्ध जहाजों की जांच कर रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन पर हुए इन हमलों की कड़ी निंदा की है। हालांकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी भी कूटनीतिक बातचीत की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं किया है। इस स्थिति के चलते क्षेत्र में रहने वाले लाखों प्रवासियों और कामगारों के बीच चिंता का माहौल है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.