ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बहुत ज्यादा बढ़ गया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, ईरान ने अमेरिका और इसराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने चेतावनी दी है कि हर फैसले की एक कीमत होती है और उसका भुगतान करना पड़ता है। इस बीच, खाड़ी क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे कुवैत और अन्य पड़ोसी देशों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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ईरान के बड़े नेताओं ने अमेरिका और इसराइल पर क्या आरोप लगाए?

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि लेबनान में इसराइली कार्रवाई और नौसैनिक नाकाबंदी साफ तौर पर अमेरिका की तरफ से सीजफायर का उल्लंघन है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि इस तरह के फैसलों की कीमत चुकानी होगी और इसका हिसाब जल्द ही सामने आएगा।

इसके साथ ही ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि लेबनान में सीजफायर होना बेहद जरूरी शर्त है। जब तक लेबनान में शांति नहीं होगी, तब तक अमेरिका के साथ कोई अंतिम समझौता नहीं हो सकता। ईरान का मानना है कि इसराइल की हरकतें और अमेरिकी नीतियां एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं।

बीते 24 घंटों में क्या हुए सैन्य हमले और जवाबी कार्रवाई?

क्षेत्र में तनाव केवल बयानों तक सीमित नहीं रहा बल्कि जमीनी स्तर पर भी बड़ी सैन्य हलचल देखी गई है। हाल ही में दोनों पक्षों के बीच सीधे हमले हुए हैं।

  • ड्रोन मार गिराया: ईरान ने अमेरिका के एक MQ-1 प्रीडेटर ड्रोन को मार गिराया, जिसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के रडार और ड्रोन कंट्रोल सेंटरों पर बमबारी की।
  • सिरीक द्वीप पर हमला: अमेरिका ने सिरीक द्वीप पर एक टेलीकम्युनिकेशन टावर को निशाना बनाया।
  • कुवैत पर जवाबी हमला: इसके जवाब में ईरान की सेना IRGC ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन दागे। कुवैत ने जानकारी दी कि उसने आने वाले ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया।

वार्ता में देरी और अविश्वास की मुख्य वजह क्या है?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने स्पष्ट किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की रफ्तार बहुत धीमी है। इसका मुख्य कारण दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी और वाशिंगटन का विरोधाभासी रुख है। ईरान ने अमेरिका पर अपने दक्षिणी प्रांतों में हमले करके सीजफायर समझौते का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपने रुख में बदलाव नहीं करता, तब तक क्षेत्र में शांति बहाल होना मुश्किल है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान ने अमेरिका के साथ समझौते के लिए क्या मुख्य शर्त रखी है?

ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, लेबनान में तुरंत सीजफायर लागू करना अमेरिका के साथ किसी भी अंतिम शांति समझौते के लिए एक अनिवार्य शर्त है।

कुवैत पर हमले के पीछे क्या कारण था?

अमेरिका द्वारा सिरीक द्वीप पर टेलीकम्युनिकेशन टावर को निशाना बनाए जाने के बाद, ईरानी सेना IRGC ने कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी ड्रोन और मिसाइल हमले किए।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.