ईरान के संसदीय अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने बुधवार को साफ कर दिया है कि देश युद्ध नहीं चाहता है लेकिन किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि United States के साथ हुए समझौते से कोई लाभ नहीं मिलता है, तो उसे मानने की कोई जरूरत नहीं है। इस बयान के बाद ईरान की संसदीय समिति ने 17 जून 2026 को हुए समझौते को अब अमान्य घोषित कर दिया है।
तनाव के कारण बिगड़े हालात
ईरान की संसदीय समिति के सदस्य Fada Hossein Maleki ने अमेरिका पर समझौते की शर्तों को तोड़ने का आरोप लगाया है। इस समझौते का उद्देश्य युद्ध को रोकना, 60 दिनों का युद्धविराम लागू करना और अमेरिका द्वारा लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाना था। अब इस समझौते के टूटने से पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा बढ़ गया है।
क्षेत्रीय स्थिति और असर
CENTCOM ने जानकारी दी है कि उन्होंने Greater Tunb द्वीप पर तटीय रक्षा प्रणालियों और मिसाइल साइटों को निशाना बनाया है ताकि Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षा की जा सके। वहीं, Iranshahr में अमेरिकी हमले में सात सैन्य कर्मियों की मौत की खबर के बाद ईरान ने जवाब देने की चेतावनी दी है। बढ़ते तनाव के कारण छह प्रांतों में परीक्षाएं भी रद्द कर दी गई हैं। ईरान ने धमकी दी है कि अगर उन पर दबाव डाला गया तो वे ऊर्जा निर्यात रोक सकते हैं और समुद्री रास्ता बंद कर सकते हैं।
