ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने दावा किया कि अमेरिका के साथ हुआ 14 सूत्रीय समझौता ईरान के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ नहीं था। यह समझौता 17-18 जून 2026 को डिजिटल रूप से हुआ था, लेकिन अब यह शांति समझौता लगभग खत्म हो चुका है। दोनों देशों के बीच तनाव इस कदर बढ़ गया है कि क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं।
समझौते का टूटना और सैन्य तनाव
ईरान के सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के हस्ताक्षर को बेकार बताया है। इसके बाद ईरान ने समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों को निभाने से मना कर दिया है। पिछले 9 दिनों से अमेरिका लगातार ईरान पर हवाई हमले कर रहा है, जिसमें अब तक 17 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है। ईरान ने जवाब में Bahrain, Kuwait और Jordan पर भी हमले किए हैं।
होरमुज जलडमरूमध्य और तेल व्यापार पर संकट
ईरान ने Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया है और धमकी दी है कि वहां से तेल या गैस की एक बूंद भी नहीं गुजरने दी जाएगी। इस कारण समुद्री व्यापार पूरी तरह रुक गया है। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों में उनका Darkhovin परमाणु बिजली संयंत्र निशाना बना है। हालांकि, कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिशें अभी भी जारी हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।
