ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर से बहुत बढ़ गया है। 14 जुलाई 2026 को अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड CENTCOM ने ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके तहत ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों में अमेरिकी नौसेना ने नाकाबंदी लागू कर दी है, ताकि ईरान के जहाजों की आवाजाही को रोका जा सके।
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ईरान का कड़ा रुख
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने साफ कर दिया है कि ईरान अपनी जमीन के हर इंच की रक्षा करेगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति की हालिया धमकियों का जवाब देते हुए कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। IRNA News Agency के अनुसार, राष्ट्रपति ने देश के अंदर एकता बनाए रखने पर जोर दिया ताकि बाहरी दबाव का मुकाबला किया जा सके।
क्षेत्र में बिगड़ते हालात
अमेरिका और ईरान के बीच पहले से चल रहा 60 दिन का अस्थाई समझौता अब पूरी तरह टूट चुका है। अमेरिका ने ईरान पर आरोप लगाया है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों को निशाना बना रहे हैं, जिसके जवाब में अमेरिका ने अपने हमले तेज कर दिए हैं। ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है और वे इसकी रक्षा के लिए हर संभव कोशिश करेंगे।
सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी नाकाबंदी के अलावा, ईरान ने अपनी क्यूशम द्वीप पर फिर से हमले होने की पुष्टि की है। फरवरी 2026 में हुए बड़े सैन्य अभियानों के बाद से दोनों देशों के बीच शांति के आसार खत्म होते दिख रहे हैं। इस स्थिति के चलते खाड़ी के समुद्री रास्तों पर भारी तनाव पैदा हो गया है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।
