ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। 19 जुलाई 2026 को ईरान ने दावा किया कि अमेरिका ने उसके निर्माणाधीन परमाणु संयंत्र पर हमला किया है, जिसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर स्ट्राइक की। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति को गंभीर बना दिया है।
परमाणु सामग्री और समझौतों पर विवाद
इस टकराव से पहले ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे थे। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 10 मई 2026 को कहा था कि अमेरिका ईरान की संवर्धित यूरेनियम (enriched uranium) पर नज़र रखे हुए है। इसके बाद 4 जून 2026 को उन्होंने दावा किया कि यूरेनियम को हटाने के लिए समझौता होने वाला है। हालांकि, 20 जून 2026 को हुए संघर्ष विराम समझौते में यूरेनियम के तत्काल समर्पण का कोई जिक्र नहीं था।
क्षेत्रीय सुरक्षा और ताजा हालात
ईरान ने Darkhovin परमाणु साइट पर हुए हमले को एक बर्बर आतंकवादी कार्रवाई बताया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से निंदा की मांग की है। दूसरी ओर, 13 जुलाई 2026 को Donald Trump ने दावा किया था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के बेहद करीब है, जिसके बाद 17 जुलाई 2026 से ही अमेरिकी हवाई हमलों में तेजी देखी गई। इस बीच, सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने सऊदी अरब को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के बिना यूरेनियम संवर्धन की अनुमति देने पर सहमति जताई है, जिससे क्षेत्रीय राजनीति में नए सवाल खड़े हो रहे हैं।
