ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने 20 जुलाई 2026 को अमेरिका के क्षेत्रीय सैन्य ठिकानों पर बड़ा हमला किया। इस हमले को Operation Nasr 2 नाम दिया गया है, जिसके तहत बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया। इस हमले के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है।

हमलों का विवरण और सैन्य नुकसान

ईरान का दावा है कि उन्होंने बहरीन के Salman Port पर अमेरिकी जहाज मरम्मत डिपो को भारी नुकसान पहुंचाया है और Al-Sakhir Airport पर ड्रोन सुविधाओं को नष्ट किया है। साथ ही, कुवैत के Arifjan base पर मौजूद अमेरिकी लॉजिस्टिक्स और सप्लाई डिपो को भी तबाह करने का दावा किया गया है। जॉर्डन के Aqaba Airport पर भी बैलिस्टिक मिसाइलें गिराई गईं, जिससे अमेरिकी विमानों को नुकसान पहुंचा है।

क्षेत्रीय प्रतिक्रिया और तनाव का कारण

बहरीन और कुवैत की सेनाओं ने पुष्टि की है कि उन्होंने अपनी तरफ आ रहे कई ड्रोन और हवाई हमलों को हवा में ही रोक दिया है। वहीं, जॉर्डन ने अपने हवाई क्षेत्र के लिए किसी भी खतरे से इनकार किया है। यह तनाव 8 जुलाई से शुरू हुआ था, जब अमेरिका ने ईरान पर जवाबी कार्रवाई की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ युद्धविराम खत्म करने का ऐलान किया है और हाल ही में जॉर्डन में मारे गए दो अमेरिकी सैनिकों का बदला लेने की बात कही है।

फिलहाल, Yemen के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के तेल जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। कतर और पाकिस्तान इस पूरे मामले को शांत कराने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कूटनीतिक बातचीत के लिए दरवाजा खुला रखने की बात कही है, जबकि ईरान की ओर से भी समान संकेत मिले हैं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.