ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच एक राहत की खबर सामने आई है कि दोनों देशों ने पिछले तीन दिनों से सैन्य हमलों को रोक दिया है। यह कदम शांति वार्ता के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए उठाया गया है। अमेरिका ने 24 जुलाई को अपने हमले रोके थे और ईरान ने 26 जुलाई को अपनी जवाबी कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
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शांति वार्ता पर ईरान का रुख
ईरान के चीन में राजदूत Abdolreza Rahmani Fazli ने स्पष्ट किया है कि उन्हें अमेरिका पर कोई भरोसा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका अपने वादों से पीछे हट जाता है और उन्होंने 17 जून 2026 को हुए इस्लामाबाद समझौते के उल्लंघन का हवाला दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने भी कहा कि अमेरिका ने बातचीत का आधार ही खत्म कर दिया है। फिलहाल, ईरान ओमान के साथ मिलकर होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री यातायात को सुरक्षित करने के लिए एक तंत्र बनाने पर चर्चा कर रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी और क्षेत्रीय हलचल
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने शांति वार्ता की उम्मीद जताई है, लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समझौता नहीं हुआ तो वे सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करेंगे। ईरान के सैन्य प्रवक्ता Ebrahim Zolfaqari ने इस चेतावनी का कड़ा जवाब दिया और कहा कि ईरान किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। इस बीच, ओमान, पाकिस्तान और कतर जैसे देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं और इसमें कुछ प्रगति की खबर है। तेल की कीमतों में भी संघर्ष रुकने के बाद गिरावट दर्ज की गई है।
