मिडिल ईस्ट में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर लगातार सातवें दिन भी हमले जारी रखे हैं। 17 और 18 जुलाई 2026 तक चले इन हवाई हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य शक्ति को कम करना है। अमेरिकी रक्षा विभाग के CENTCOM के अनुसार, इन हमलों में ईरान के रडार, सैन्य ठिकाने, मिसाइल सिस्टम और ड्रोन सुविधाओं को निशाना बनाया गया है।
तनाव का असर और ईरान की चेतावनी
ईरान के सरकारी मीडिया IRNA के मुताबिक, यज़्द, लार, अहवाज़, सिरीक, बुशहर और बंदर अब्बास जैसे कई शहरों में धमाकों की आवाज सुनी गई। इन हमलों में अब तक 8 लोगों की मौत हुई है और करीब 20 लोग घायल बताए जा रहे हैं। ईरान के सैन्य सलाहकार मोहसेन रेज़ाई ने चेतावनी दी है कि अगर ये हमले नहीं रुके, तो ईरान एक बड़े सैन्य अभियान के साथ पलटवार करेगा। ईरान का दावा है कि उसने अमेरिका के सहयोग वाले कुछ अरब देशों में स्थित अमेरिकी बेस पर भी हमले किए हैं।
बंद हुआ हॉर्मुज जलडमरूमध्य और बढ़ती मुश्किलें
इस संघर्ष के बीच तेहरान ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है, जिससे समुद्री व्यापार पर असर पड़ना तय है। अमेरिका ने ईरान की बंदरगाहों की ओर जाने वाले 4 मालवाहक जहाजों को रोका है और पहले भी एक तेल टैंकर को मिसाइल से नाकाम किया था। इस समय मिडिल ईस्ट में करीब 50,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे पर हमलों को गलत बताया है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीतिक बातचीत के रास्ते खुले रहने की बात भी कही है।
