ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है, जहाँ ईरान ने अमेरिका पर सामूहिक दंड देने की नीति अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। यह स्थिति तब और बिगड़ गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने धमकी दी कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाया, तो अमेरिका ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे जैसे पुल और बिजली संयंत्रों पर बमबारी करेगा। इस धमकी के बाद से दोनों देशों के बीच टकराव के हालात बन गए हैं।
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ईरान ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने 23 जुलाई 2026 को कहा कि अमेरिका की यह नीति अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है। ईरान ने अमेरिकी सैन्यकर्मियों को भी सचेत किया है कि वे ऐसे अवैध आदेशों का पालन न करें, क्योंकि उच्च अधिकारियों का आदेश युद्ध अपराधों के लिए उन्हें कानूनी जिम्मेदारी से नहीं बचा सकता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा संकट
यह तनातनी 20 जुलाई 2026 को डार्खोविन परमाणु संयंत्र पर कथित अमेरिकी हमले के बाद और तेज हो गई है। ईरान के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Amir Mohammad Akramian ने कहा है कि संघर्ष अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी हमले जारी रहते हैं, तो वे अपनी नई सैन्य रणनीति अपनाएंगे और उन ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाएंगे जहाँ अमेरिका के हित जुड़े हैं। हालांकि, ईरान को डी-एस्केलेशन यानी तनाव कम करने के लिए मध्यस्थों से नए प्रस्ताव मिले हैं, लेकिन फिलहाल सीधी बातचीत की कोई योजना नहीं है।
