अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए जिसके जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। इस टकराव के बाद अब दोनों देशों के बीच शांति की उम्मीदें खत्म होती दिख रही हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में तीन कमर्शियल जहाजों पर हमला किया था, जिसका बदला लेने के लिए अमेरिका ने सटीक मिसाइलों से ईरान के कई साइट्स को तबाह कर दिया। इस हमले में ईरान के 8 सैनिकों की मौत हो गई।
ईरान की सेना ने तुरंत पलटवार करते हुए बहरीन के Sheikh Isa Air Base और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर लड़ाकू ड्रोन दागे। ईरान ने चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी बेस अब उनके निशाने पर रहेंगे।
ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा की कड़ी निंदा की है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को “गंदगी” (scum) कहा और ऐलान किया कि शांति वार्ता अब खत्म हो चुकी है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में और हमले हो सकते हैं।
विदेश मंत्री Araghchi ने कहा कि जब तक धमकी जारी रहेगी, अमेरिका के साथ किसी अंतिम समझौते पर बातचीत शुरू नहीं होगी। उन्होंने अमेरिका से इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) के पैराग्राफ 13 का सम्मान करने को कहा।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने अमेरिका पर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में मुश्किलें पैदा करने का आरोप लगाया। वहीं संसद के प्रवक्ता Ebrahim Rezaei ने सख्त चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने फिर हमला किया, तो एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा वापस नहीं जाएगा।
दूसरी तरफ, NATO के महासचिव Mark Rutte ने अमेरिका के हमलों को बिल्कुल जरूरी बताया है। वहीं पाकिस्तान ने, जो इस्लामाबाद समझौते में मध्यस्थ था, दोनों देशों से फिर से शांति समझौते की ओर लौटने की अपील की है।
