ईरान पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, शांति वार्ता को लेकर तेहरान के दोहरे रवैये पर जताई नाराजगी

Nura Basta6 August 20262 min read72 viewsWorld
ईरान पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, शांति वार्ता को लेकर तेहरान के दोहरे रवैये पर जताई नाराजगी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के रुख को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने तेहरान पर शांति वार्ता के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। राष्ट्रपति का कहना है कि एक तरफ ईरान सार्वजनिक रूप से बातचीत से इनकार कर रहा है, तो दूसरी तरफ पर्दे के पीछे दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा का सिलसिला जारी है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव का कारण बनी हुई है, जिससे खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासियों के बीच भी चिंताएं बढ़ गई हैं।

ईरान के दोहरे बर्ताव पर ट्रंप की चेतावनी

वॉशिंगटन से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि ईरान का नेतृत्व जिस तरह का व्यवहार दिखा रहा है, वह भरोसे के काबिल नहीं है। उनके मुताबिक, तेहरान पहले खुद बैठक की मांग करता है और बातचीत का कार्यक्रम भी तय करता है, लेकिन बाद में दुनिया के सामने यह कहता है कि कोई चर्चा नहीं हो रही है। ईरान का यह दावा है कि ओमान में हुई हालिया बैठकें केवल हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए एक अस्थायी व्यवस्था तक सीमित थीं।

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सैन्य हमले और वार्ता की सच्चाई

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने हाल ही में ईरान पर होने वाले प्रस्तावित बड़े सैन्य हमले को इसलिए रोक दिया था, क्योंकि उस समय युद्धविराम और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को तेल और गैस के जहाजों के लिए खोलने को लेकर एक वैकल्पिक योजना पर काम चल रहा था। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान भले ही इसे माने या न माने, लेकिन परमाणु हथियार विकसित करने की संभावनाओं को रोकने को लेकर दोनों पक्षों के बीच बातचीत हकीकत में जारी है। इस पूरी घटना की अधिक जानकारी हिन्दुस्थान समाचार द्वारा साझा की गई है।

ईरान की ओर से अभी तक ट्रंप के इन ताजा आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इस तरह की कूटनीतिक तनातनी का असर अक्सर समुद्री मार्गों और तेल की कीमतों पर पड़ता है, जिसका सीधा प्रभाव खाड़ी के देशों में काम करने वाले भारतीयों की दिनचर्या और वहां की सुरक्षा स्थिति पर होता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे चल रही यह वार्ता किसी ठोस नतीजे पर पहुंच पाती है या फिर तनाव और अधिक बढ़ता है।

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