ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत पूरी तरह फेल हो गई है। ईरान ने यूरेनियम संवर्धन को 5 साल तक रोकने का ऑफर दिया था, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसे खारिज कर दिया। अब अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दी है, जिससे दुनिया भर में तनाव बढ़ गया है और कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल आया है।

ईरान और अमेरिका के बीच किस बात पर हुआ विवाद

ईरान ने प्रस्ताव दिया था कि वह यूरेनियम संवर्धन को कुछ समय के लिए रोक सकता है। हालांकि, अमेरिका ने 20 साल की पाबंदी की मांग की थी, जिसे ईरान ने मानने से इनकार कर दिया। इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे की लंबी बातचीत के बाद भी दोनों देश किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की कोई अनुमति नहीं दी जाएगी और सभी परमाणु सामग्री को हटाना होगा।

अमेरिका की नाकाबंदी और दुनिया पर इसका असर

बातचीत टूटने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार सुबह से ईरानी बंदरगाहों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी का आदेश दिया। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 103 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई है। ईरान ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह अमेरिकी युद्धपोतों को कड़ा जवाब देगा।

मुख्य बिंदु विवरण
बातचीत का स्थान इस्लामाबाद, पाकिस्तान
ईरान का प्रस्ताव 5 साल तक संवर्धन रोकना
अमेरिका की मांग 20 साल की पाबंदी
ताजा एक्शन ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी
तेल की कीमत 103 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर
युद्धविराम की स्थिति 9 दिनों में समाप्त होगा

अब आगे क्या होगा और क्या है ताजा स्थिति

दोनों देशों के बीच 7 अप्रैल को शुरू हुआ दो हफ्ते का युद्धविराम अब नौ दिनों में खत्म होने वाला है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों पक्षों से फिर से बातचीत करने की अपील की है। उन्होंने साफ कहा है कि इस विवाद का कोई सैन्य समाधान नहीं है और शांति बनाए रखना जरूरी है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने नेक नियत से बात की, लेकिन अमेरिका ने शर्तें बदल दीं और नाकाबंदी कर दी।