ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के 58वें दिन तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच शांति की कोशिशें नाकाम रहीं और बातचीत बीच में ही रुक गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूतों का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया है, जिससे अब शांति की उम्मीदें कम होती दिख रही हैं।
अमेरिका और ईरान की बातचीत क्यों रुकी?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने खास दूतों, Steve Witkoff और Jared Kushner की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने युद्धविराम का जो प्रस्ताव दिया था, वह काफी था लेकिन पर्याप्त नहीं था। उन्होंने साफ किया कि ईरान को किसी भी हाल में परमाणु हथियार नहीं बनाने चाहिए। ट्रंप ने यह भी बताया कि ईरान की लीडरशिप में काफी अंदरूनी लड़ाई और उलझन चल रही है। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार अमेरिकी नौसेना Strait of Hormuz से ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटा रही है।
ईरान और अन्य देशों का क्या रुख है?
- ईरान: विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने पाकिस्तान में लंबी मीटिंग के बाद ओमान का रुख किया। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा कि वे धमकी या नाकाबंदी के दबाव में बातचीत नहीं करेंगे और उन्होंने अमेरिका से पहले नाकाबंदी हटाने की मांग की।
- पाकिस्तान: प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने कहा कि पाकिस्तान शांति के लिए पूरी ईमानदारी से एक मददगार की भूमिका निभाएगा।
- जर्मनी: जर्मनी ने भूमध्य सागर में अपने नौसैनिक जहाजों को भेजने का फैसला किया है ताकि जरूरत पड़ने पर वे Strait of Hormuz में मिशन को अंजाम दे सकें।
समुद्र और बॉर्डर पर क्या हलचल है?
U.S. Central Command (CENTCOM) ने अरब सागर में M/V Sevan नाम के एक जहाज को पकड़ा है, जो ईरान के प्रतिबंधित जहाजों के बेड़े से जुड़ा था। अब इस जहाज को वापस ईरान भेजा जा रहा है। अमेरिका ने अब तक 37 जहाजों को रास्ता बदलने पर मजबूर किया है। वहीं, ईरान की Revolutionary Guards ने कहा है कि Strait of Hormuz पर नियंत्रण रखना उनकी मुख्य रणनीति है। दूसरी तरफ, इसराइल ने सीज़फायर के बावजूद दक्षिणी लेबनान में हमले जारी रखे हैं।