ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध अब खत्म होने की कगार पर है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) ने इसकी पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच युद्ध रोकने के लिए एक समझौता (MoU) फाइनल हो गया है। इस खबर के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें 19 जून पर टिकी हैं।

ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर Kazem Gharibabadi ने टेलीविजन पर बताया कि इस डील को स्वीकार कर लिया गया है। यह समझौता 15 जून की शाम को अंतिम रूप दिया गया। अब 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में इस पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर होंगे।

इस समझौते के तहत अब सभी मोर्चों पर, जिसमें लेबनान भी शामिल है, सैन्य ऑपरेशन तुरंत और हमेशा के लिए बंद कर दिए जाएंगे। साथ ही, ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी (naval blockade) को भी पूरी तरह हटा लिया जाएगा।

ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Seyed Mojtaba Khamenei ने इस समझौते को अपनी मंजूरी दे दी है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी अपने Truth Social प्लेटफॉर्म पर इस खबर का स्वागत किया और नाकाबंदी हटाने का आदेश दे दिया। उन्होंने Strait of Hormuz को फिर से खोलने की घोषणा भी की।

इस पूरे मामले में पाकिस्तान ने अहम भूमिका निभाई, जिसने 8 अप्रैल को युद्धविराम (ceasefire) करवाया था। कतर ने भी इस बीच मध्यस्थता में मदद की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते के ड्राफ्ट में कुछ अहम बिंदु शामिल किए गए हैं:

  • युद्ध और सैन्य हमलों का तुरंत और स्थायी रूप से अंत होगा।
  • 30 दिनों के भीतर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म की जाएगी।
  • 60 दिनों की बातचीत के दौरान ईरान की जमी हुई 24 अरब डॉलर की संपत्ति वापस मिलेगी।
  • अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा।
  • अमेरिका अपनी सेना को ईरान के आसपास के इलाकों से हटाएगा।

ईरान की मिलिट्री कमांड Khatam al-Anbiya ने दावा किया कि उनके सशस्त्र बलों और प्रतिरोध मोर्चे ने अमेरिकी और जियोनिस्ट दुश्मनों को हार मानने पर मजबूर कर दिया। परमाणु मुद्दे और प्रतिबंधों को हटाने पर दूसरी राउंड की बातचीत MoU साइन होने और शर्तों के लागू होने के बाद शुरू होगी।