ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध अब खत्म हो गया है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने 16 जून 2026 को इसकी पुष्टि की है। अब दोनों देशों के बीच एक अहम समझौता (MoU) होने जा रहा है, जिससे दुनिया भर में शांति की उम्मीद जगी है।

समझौते की शर्तें और चेतावनी

विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने चेतावनी दी है कि अगर इसराइल ने लेबनान पर अपना कब्जा जारी रखा या वहां हमले किए, तो इसे अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का उल्लंघन माना जाएगा। उन्होंने साफ किया कि लेबनान में युद्ध का पूरी तरह खत्म होना इस समझौते का एक जरूरी हिस्सा है।

यह समझौता (MoU) अभी डिजिटल तरीके से साइन हो चुका है। अब 19 जून, शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के Geneva में दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर इस पर औपचारिक साइन करेंगे। इसके बाद बातचीत का एक नया दौर भी शुरू होगा।

नेताओं और देशों की प्रतिक्रिया

अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि यह समझौता फिलहाल एक सामान्य दस्तावेज़ है जो करीब डेढ़ पेज का है। बाकी की बारीकियों पर आने वाले दिनों में बातचीत होगी। वहीं, इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा है कि इसराइल इस समझौते से बंधा नहीं है और वह अपनी सुरक्षा के लिए लेबनान में कदम उठाना जारी रखेगा।

लेबनान के प्रधानमंत्री Nawaf Salam अभी भी इसराइली सेना की पूरी वापसी के लिए अमेरिका के साथ डिप्लोमैटिक कोशिशें कर रहे हैं। जापान ने भी इस समझौते का स्वागत किया है और कहा है कि Hormuz Strait के जरिए जहाजों का आना-जाना सुरक्षित होना बहुत जरूरी है।

प्रमुख अपडेट और आगे की योजना

  • Hormuz Strait में जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है और शुक्रवार तक यह रास्ता पूरी तरह खुल जाएगा।
  • ईरान की जमी हुई संपत्ति (frozen assets) को लेकर अभी मतभेद हैं। ईरान का कहना है कि कुछ फंड जारी होंगे, लेकिन अमेरिका ने बड़ी रकम देने से इनकार किया है।
  • अगले 60 दिनों तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में ढील देने पर बातचीत चलेगी।
  • इस पूरी प्रक्रिया में Pakistan ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है, जबकि Qatar, Saudi Arabia और Turkey ने इसमें मदद की है।