अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां कोई भी पक्ष जीत नहीं रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने और परमाणु समझौते पर सहमति न बनने से अंतरराष्ट्रीय तनाव काफी बढ़ गया है। इस स्थिति का सीधा असर वैश्विक व्यापार और तेल की सप्लाई पर पड़ सकता है जिससे पूरी दुनिया की नजरें इस विवाद पर टिकी हैं।

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होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की क्या स्थिति है?

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 18 अप्रैल को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया है और जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म नहीं करता, यह रास्ता बंद रहेगा। इससे पहले 17 अप्रैल को इसे कुछ समय के लिए खोला गया था, लेकिन उस समय IRGC ने साफ किया था कि जहाजों को पार करने के लिए ईरानी सेना से अनुमति लेनी होगी और तय किए गए रास्ते पर ही चलना होगा।

परमाणु समझौते और बातचीत में क्या अड़चनें आ रही हैं?

  • अमेरिकी पक्ष: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 17 अप्रैल को संकेत दिया था कि ईरान के साथ समझौता करीब है, लेकिन बाद में 26 अप्रैल को उन्होंने दूतों के दौरों को रद्द कर दिया। उन्होंने ईरान के प्रस्ताव को नाकाफी बताया और वहां के नेतृत्व में भ्रम की बात कही।
  • ईरान का पक्ष: राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने साफ तौर पर कहा कि वे दबाव या नाकेबंदी के बीच किसी भी थोपी गई बातचीत का हिस्सा नहीं बनेंगे। उन्होंने मांग की कि पहले अमेरिका परिचालन संबंधी बाधाओं और बंदरगाहों की नाकेबंदी को हटाए।
  • परमाणु अधिकार: यूनिवर्सिटी ऑफ तेहरान के प्रोफेसर हसन अहमदियान ने कहा कि यूरेनियम संवर्धन ईरान का संप्रभु अधिकार है और वे इसे रोकने या स्टॉक सौंपने की मांग को स्वीकार नहीं करेंगे।

दुनिया के अन्य देशों की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने ईरान पर चल रहे इस युद्ध की आलोचना की है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को जबरन खोलने के लिए मांगे गए सैन्य अभियान में शामिल होने से मना कर दिया। हालांकि, उन्होंने रास्ता खुलने के बाद वहां सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करने की पेशकश की। इसी तरह ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी इस जलमार्ग में सुरक्षा बहाल करने के प्रयासों का समर्थन किया है।