ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग को एक महीना बीत चुका है और तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर साफ कर दिया है कि पिछले 31 दिनों के दौरान उनकी अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा कर रहे हैं कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। इस टकराव का असर अब पूरे खाड़ी क्षेत्र और सऊदी अरब जैसे देशों पर भी दिखने लगा है।

ईरान और अमेरिका के बीच दावों में अंतर

  • ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने कहा कि उन्हें बिचौलियों के जरिए कुछ संदेश मिले हैं, लेकिन अमेरिका के प्रस्ताव तर्कहीन और बहुत ज्यादा मांगों वाले थे।
  • ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका और इजराइल के हमलों को एक निराशाजनक कोशिश बताया है।
  • संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने भी अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत की खबर को पूरी तरह गलत करार दिया है।
  • दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का दावा है कि वह ईरान के नए और समझदार शासन के साथ बातचीत कर रहे हैं।
  • अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही समझौता नहीं हुआ, तो वह ईरान के ऊर्जा संसाधनों और बिजली घरों को पूरी तरह तबाह कर देगा।

युद्ध के 31 दिनों के दौरान हुए बड़े नुकसान

स्थान / पक्ष मुख्य घटनाक्रम
कुवैत और इजराइल ईरान ने कुवैत के वाटर प्लांट और इजराइल की तेल रिफाइनरी पर जवाबी हमला किया।
सऊदी अरब सऊदी में प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर एक अमेरिकी विमान के नष्ट होने की खबर मिली।
अमेरिकी सैन्य बल मिडिल ईस्ट में हजारों नए अमेरिकी सैनिकों और मरीन की तैनाती की गई है।
नाटो (NATO) नाटो ने तुर्की की ओर आती एक ईरानी मिसाइल को रास्ते में ही रोक दिया।
पाकिस्तान पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए अमेरिका का 15 सूत्रीय प्लान तेहरान तक पहुंचाया है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रवासियों पर प्रभाव

इस युद्ध को Operation Epic Fury का नाम दिया गया है जो 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। ईरान ने कहा है कि वह सैन्य हमले के बीच केवल अपनी रक्षा पर ध्यान दे रहा है और शांति के लिए युद्ध के नुकसान की भरपाई जरूरी है। यमन के हूती विद्रोहियों के भी इस जंग में शामिल होने से तनाव और बढ़ गया है। सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की जैसे देश इस संघर्ष को रोकने की कोशिशों में लगे हैं क्योंकि इसका सीधा असर वहां रह रहे प्रवासियों और व्यापार पर पड़ रहा है। आने वाले कुछ दिनों में पाकिस्तान में शांति वार्ता आयोजित होने की उम्मीद है जिससे कुछ समाधान निकल सकता है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.