ईरान और अमेरिका के बीच खेती के उत्पादों की खरीद को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह अमेरिका से अनाज और फसलें खरीद सकता है, लेकिन यह पूरी तरह से बाजार के सही दामों और सामान की क्वालिटी पर निर्भर करेगा। इस पूरे मामले में दोनों देशों के बीच शर्तों को लेकर खींचतान चल रही है।
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दाम और क्वालिटी पर ईरान का जोर
ईरान के कृषि मंत्री Gholamreza Nouri Ghezeljeh ने 1 जुलाई 2026 को साफ किया कि ईरान किसी भी अमेरिकी कंपनी से सामान खरीदने के लिए मजबूर नहीं है। उन्होंने बताया कि अगर अमेरिकी सप्लायर सही दाम और अच्छी क्वालिटी का सामान देंगे, तभी खरीदारी की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर शर्तें सही नहीं रहीं, तो ईरान दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से अपनी जरूरत का सामान खरीदेगा।
जमे हुए पैसों पर विवाद
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने कई बार कहा है कि ईरान के जो पैसे विदेशों में जमे हुए हैं, उनका इस्तेमाल अमेरिकी खेती के सामान जैसे गेहूं, सोयाबीन और मक्का खरीदने के लिए होना चाहिए। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने 25 जून को कहा था कि इन पैसों के इस्तेमाल की निगरानी दोहा, कतर में अमेरिकी अधिकारियों द्वारा की जाएगी।
दूसरी तरफ, ईरान के सेंट्रल बैंक गवर्नर Abdolnasser Hemmati और संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने इन दावों को खारिज कर दिया। उनका कहना है कि रिलीज हुए पैसों को कहां और कैसे खर्च करना है, इसका फैसला सिर्फ ईरान की सरकार करेगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने भी यही बात दोहराई कि खरीद का फैसला सिर्फ कीमत और क्वालिटी के आधार पर होगा।
कतर की भूमिका और ताजा स्थिति
दोनों देशों के बीच 17 जून 2026 को एक समझौता पत्र (MOU) पर साइन हुए थे, जिसका मकसद जमे हुए पैसों को फिर से उपलब्ध कराना था। लेकिन कतर के विदेश मंत्रालय ने 1 जुलाई को कन्फर्म किया कि अभी तक कोई पैसा ट्रांसफर नहीं किया गया है। पैसों की रिलीज बातचीत में होने वाली प्रगति पर निर्भर करेगी।
- ईरान ने अमेरिका की उन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है जिनमें पैसों के इस्तेमाल का तरीका तय किया गया था।
- ईरान इस समय दक्षिण अमेरिकी देशों से भी अनाज मंगवा रहा है, जिससे उसके पास अन्य विकल्पों की कमी नहीं है।
- कतर और पाकिस्तान इस समय दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
