10 जून 2026 को ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण दोनों देशों के बीच शांति वार्ता खटाई में पड़ गई है। रात में हुई बड़ी सैन्य झड़पों के बाद ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अब अमेरिका के साथ बातचीत की स्थिति की नए सिरे से समीक्षा की जाएगी। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बघई ने इस स्थिति के लिए पूरी तरह से अमेरिका और इसराइल को जिम्मेदार ठहराया है। इसके साथ ही ईरान ने खाड़ी देशों को भी अपनी धरती का इस्तेमाल विरोधी गतिविधियों के लिए न होने देने की सख्त चेतावनी दी है।

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आखिर कैसे शुरू हुआ यह नया सैन्य विवाद?

इस पूरे विवाद की शुरुआत सोमवार, 8 जून को हुई जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया गया। सूत्रों के अनुसार, इस हेलीकॉप्टर को ईरान के एक सशस्त्र शाहेद ड्रोन से निशाना बनाया गया था। इसके जवाब में मंगलवार, 9 जून की रात को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के हवाई क्षेत्र और रडार ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए। इन हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है।

ईरान का पलटवार और खाड़ी देशों को सख्त चेतावनी

अमेरिकी हमले के बाद बुधवार सुबह ईरान ने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में बने सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले शुरू कर दिए। जॉर्डन ने अपने मुवाफ्फाक साल्टी एयर बेस की ओर आ रही 5 ईरानी मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया, जहां अमेरिकी F-35 विमान तैनात हैं। बहरीन में भी अमेरिकी पांचवें बेड़े पर ड्रोन हमले के बाद सायरन बजाए गए।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में खाड़ी देशों को अपनी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी याद दिलाई है। ईरान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि खाड़ी देश अपनी ज़मीन, हवाई क्षेत्र या किसी भी सैन्य ठिकाने का इस्तेमाल अमेरिकी या इसराइली सेना को ईरान के खिलाफ हमले की साजिश रचने या मदद करने के लिए न करने दें।

शांति वार्ता पर फिरा पानी और मौजूदा स्थिति

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले संकेत दिए थे कि ईरान के साथ बातचीत अंतिम चरण में है और दो-तीन दिनों में समझौता हो सकता है, लेकिन अब इन हमलों के बाद शांति वार्ता पूरी तरह से अनिश्चित हो गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फोन पर सऊदी अरब और तुर्की के विदेश मंत्रियों से इस बिगड़ते सुरक्षा माहौल पर चर्चा की है, जबकि कतर दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिशों में जुटा है। दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल 2026 से युद्धविराम लागू था, जिसका हाल के दिनों में लगातार उल्लंघन देखा गया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान ने खाड़ी देशों को क्या चेतावनी दी है?

ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि खाड़ी देशों की यह कानूनी और नैतिक ज़िम्मेदारी है कि वे अपनी ज़मीन या सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल अमेरिका या इसराइल को ईरान के खिलाफ हमला करने के लिए न करने दें।

दोनों देशों के बीच हालिया झड़प की मुख्य वजह क्या थी?

यह तनाव हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान द्वारा अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराने के बाद शुरू हुआ, जिसके जवाब में अमेरिका ने हवाई हमले किए और फिर ईरान ने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में बने बेस को निशाना बनाया।