ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बहुत बढ़ गया है. इस वजह से तेल, गैस और खाद की सप्लाई रुक गई है जिससे दुनिया भर में कीमतें बढ़ रही हैं. हालत यह है कि कई विकासशील देशों में खाने-पीने के संकट का डर पैदा हो गया है और अमेरिकी जनता भी ईंधन की बढ़ती कीमतों से परेशान है.
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में क्या चल रहा है और दुनिया पर इसका क्या असर है?
ईरान ने इस समुद्री रास्ते पर अपना नियंत्रण कड़ा कर दिया है, जिसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है. 26 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नाकेबंदी के कारण यहां व्यापारिक जहाजों की आवाजाही लगभग शून्य हो गई है और 400 से ज्यादा नाविक खाड़ी में फंसे हुए हैं. अमेरिकी नौसेना अब यहां ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने का काम कर रही है, जिसमें विशेषज्ञों के अनुसार कई महीने लग सकते हैं. इस पूरे विवाद की वजह से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन पूरी तरह पंगु हो गई है.
ईरान के नए नियम और भारतीय जहाजों के साथ क्या हुआ?
ईरान ने इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए और सख्त नियम लागू किए हैं. अब जहाजों को रिवोल्यूशनरी गार्ड की मंजूरी लेनी होगी और केवल तय किए गए रास्तों पर ही चलना होगा. ईरान यहां पारगमन शुल्क या “टोल” वसूलने की योजना बना रहा है, जिसमें क्रिप्टो टोल का विकल्प भी शामिल हो सकता है. इस तनाव का असर भारत पर भी पड़ा है, जहाँ जग अर्नव और सनमार हेराल्ड नाम के दो भारतीय जहाजों पर गोलीबारी की खबर आई, जिसके बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा. भारत सरकार ने इस मामले पर कड़ी नाराजगी जताई और ईरानी राजदूत को तलब किया.
शांति वार्ता और मौजूदा स्थिति
अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ता हुई थी, लेकिन 25 अप्रैल 2026 को यह बातचीत विफल रही. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया कि उनकी सेना पर कोई भी हमला संघर्ष विराम का उल्लंघन माना जाएगा. वहीं, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह मध्य पूर्व में अपने सैन्य ठिकाने बंद करे, तभी इस रास्ते को पूरी तरह खोलने पर विचार किया जाएगा.