ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को खत्म करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अहम बातचीत हुई है। यह मुलाकात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित दो हफ्ते के युद्ध विराम के बाद हुई। पाकिस्तान इस पूरी बातचीत में एक बीच के रास्ते के तौर पर काम कर रहा है ताकि दोनों देशों के बीच चल रहे विवाद को सुलझाया जा सके।

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इस बातचीत में कौन-कौन शामिल हुए

ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालिबाफ के नेतृत्व में एक बड़ा दल पहुंचा, जिसमें विदेश मंत्री अब्बास अरागची और बैंक के गवर्नर अब्दुल नासिर हम्तेई जैसे अधिकारी शामिल थे। अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने हिस्सा लिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दोनों देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और इसे एक बड़ा मौका बताया।

ईरान ने बातचीत के लिए क्या शर्तें रखीं

ईरान ने बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए 10 मुख्य शर्तें रखी हैं। इन शर्तों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में कोई हमला न हो और ईरान के अधिकारों को मान्यता मिले। मुख्य शर्तें नीचे दी गई टेबल में देखी जा सकती हैं।

ईरान की मुख्य शर्तें
किसी भी तरह के हमले से बचना
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण रहना
यूरेनियम समृद्ध करने के अधिकार को मान्यता देना
सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाना
सुरक्षा परिषद के पुराने फैसलों को खत्म करना
ईरान को नुकसान का मुआवजा देना
क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी
सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को रोकना

बातचीत का अब तक क्या नतीजा निकला

ईरान के राजदूत रज़ा अमीरी मुकदम ने 12 अप्रैल 2026 को कहा कि इस्लामाबाद की यह बातचीत कोई छोटी घटना नहीं है, बल्कि यह एक लंबा रास्ता है। उन्होंने बताया कि इससे एक ऐसा ढांचा तैयार होगा जिससे दोनों देशों के हितों का ख्याल रखा जा सके। हालांकि, ईरान में कुछ लोग इस बात को लेकर शक में हैं क्योंकि इसराइल की तरफ से बार-बार युद्ध विराम तोड़ा गया। बातचीत के अंतिम विवरण बैठक खत्म होने के बाद आधिकारिक तौर पर बताए जाएंगे।