ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने इसका सीधा ज़िम्मेदार अमेरिका को ठहराया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की सख्त शर्तों और नेक नीयती की कमी की वजह से यह समझौता नहीं हो पाया। इस बीच तनाव इतना बढ़ गया है कि अमेरिका ने ईरान की समुद्री नाकेबंदी कर दी है।

इस्लामाबाद में क्या हुआ और बातचीत क्यों टूटी?

पाकिस्तान की मध्यस्थता में 11 और 12 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच करीब 21 घंटे तक बातचीत चली। ईरान का दावा है कि वे समझौते के बहुत करीब थे, लेकिन आखिरी समय में अमेरिका ने अपनी शर्तें बदल दीं। दूसरी तरफ, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जेडी वेंस ने कहा कि ईरान परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी उनकी मांगों को मानने के लिए तैयार नहीं था, इसलिए यह बातचीत नाकाम रही।

नाकेबंदी और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर चेतावनी

बातचीत टूटने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 अप्रैल को ईरान पर नेवल ब्लॉकेड यानी समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया। ईरान ने इसे समुद्री लुटेरों जैसी हरकत बताया है। राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने चेतावनी दी है कि अगर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा को खतरा हुआ, तो इसका असर पूरी दुनिया के व्यापार पर पड़ेगा। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से फोन पर बात कर अमेरिका पर दबाव बनाने की अपील की है।

आगे क्या होगा और कब तक है युद्धविराम?

फिलहाल दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल को तय हुआ युद्धविराम 22 अप्रैल तक लागू है। पाकिस्तान ने एक बार फिर दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर बुलाने का प्रस्ताव दिया है। ऐसी खबरें हैं कि इस हफ्ते शुक्रवार से रविवार के बीच अमेरिकी और ईरानी टीमें दोबारा इस्लामाबाद पहुँच सकती हैं। दुनिया की नज़रें अब इस बात पर हैं कि क्या दूसरा दौर सफल होगा या तनाव और बढ़ेगा।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.