ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने की बड़ी खबर आ रही है. दोनों देश एक समझौते (MOU) पर लगभग सहमत हो चुके हैं जिससे युद्ध खत्म हो सकता है. ईरान का सुप्रीम लीडर अब इस समझौते की बारीकियों को देख रहा है ताकि अंतिम फैसला लिया जा सके.

क्या है इस समझौते में

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने बताया कि अमेरिका के साथ समझौते का मसौदा लगभग तैयार है. हालांकि, ईरान ने यह साफ कर दिया है कि वह अपनी लाल रेखाओं से समझौता नहीं करेगा. खबर है कि यह समझौता 14 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में साइन हो सकता है. अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भी संकेत दिए हैं कि डील आखिरी स्टेज पर है और उन्होंने ईरान पर हमले की योजना रद्द कर दी है.

लेबनान युद्ध और सैन्य कार्रवाई

इस समझौते का मुख्य मकसद सभी मोर्चों पर युद्ध को खत्म करना है, जिसमें लेबनान भी शामिल है. रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिर्फ युद्धविराम नहीं होगा बल्कि सैन्य अभियानों को पूरी तरह रोकने की बात होगी. Washington ने भरोसा दिया है कि अगर यह डील साइन होती है, तो वह Israel को लेबनान में युद्ध खत्म करने के लिए सुनिश्चित करेगा.

परमाणु कार्यक्रम और हॉर्मुज जलडमरूमध्य

परमाणु मुद्दे पर फिलहाल कोई सहमति नहीं बनी है. इस पर बातचीत युद्ध खत्म होने के 60 दिन बाद शुरू होगी. ईरान ने साफ कहा है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं करेगा और न ही कोई नई प्रतिबद्धता जताएगा. वहीं, Strait of Hormuz के मैनेजमेंट पर ईरान का पूरा कंट्रोल रहेगा और वह केवल Oman के साथ मिलकर इसे संभालेगा, इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं होगी.

मध्यस्थ देशों की भूमिका

इस मुश्किल बातचीत को सफल बनाने में Qatar और Pakistan ने अहम भूमिका निभाई है. इन दोनों देशों ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच बातचीत का रास्ता खोला. Oman ने भी हॉर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर चर्चा में मदद की. ईरान के सशस्त्र बलों ने पहले चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने हमले किए तो पूरे मिडिल ईस्ट में बड़ा युद्ध छिड़ सकता है, जिससे तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ेगा.

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.