ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव अब खत्म होने की कगार पर है। ईरान के विदेश मंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच एक समझौता (MoU) लगभग तैयार है। यह खबर पूरी दुनिया के लिए बड़ी है क्योंकि इससे मिडिल ईस्ट में शांति आ सकती है और युद्ध का खतरा कम हो सकता है।

ℹ: Saudi Arabia Action: सऊदी की खुफिया जानकारी से लेबनान में बड़ी कामयाबी, 39 लाख नशीली गोलियां की गईं नष्ट

समझौते की तैयारी और समीक्षा

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने 12 जून 2026 को जानकारी दी कि यह समझौता बहुत छोटा है और इसमें दो पन्नों से ज्यादा कुछ नहीं है। उन्होंने बताया कि इस दस्तावेज को ईरान के विदेश मंत्रालय, इंटेलिजेंस और अन्य जरूरी विभागों ने अच्छी तरह चेक कर लिया है। मंत्री ने मीडिया से अपील की कि जब तक यह पूरी तरह फाइनल नहीं हो जाता, तब तक इसके बारे में अटकलें न लगाई जाएं।

डील में शामिल मुख्य शर्तें

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस 14-सूत्रीय ड्राफ्ट में कई बड़ी बातें शामिल हैं, जो दोनों देशों के रिश्तों को बदल सकती हैं। इसकी मुख्य शर्तें नीचे दी गई हैं:

मुख्य बिंदु विवरण
लड़ाई पर रोक सभी मोर्चों (लेबनान सहित) पर तुरंत और स्थायी रूप से लड़ाई बंद होगी।
आंतरिक मामले अमेरिका ईरान के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देगा।
नेवल ब्लॉकैड 30 दिनों के भीतर समुद्री नाकेबंदी पूरी तरह हटा ली जाएगी।
सेना की वापसी अमेरिका ईरान के आसपास के इलाकों से अपनी सेना वापस बुलाएगा।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य ईरानी इंतजामों के तहत 30 दिनों में Strait of Hormuz को फिर से खोला जाएगा।
तेल प्रतिबंध ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल कमाई पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएंगे।
वित्तीय संसाधन ईरान को अपने जमा किए गए पैसों तक पूरी पहुंच मिलेगी।
परमाणु मुद्दा परमाणु मुद्दों और पूर्ण प्रतिबंध हटाने के लिए 60 दिन की बातचीत होगी।

मध्यस्थता और आखिरी फैसला

इस शांति समझौते को कराने में पाकिस्तान और कतर ने अहम भूमिका निभाई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने ऐलान किया कि समझौते का अंतिम टेक्स्ट तैयार हो चुका है। वहीं, अमेरिकी अधिकारियों ने भी संकेत दिए कि वे समाधान के बहुत करीब हैं और यह डील ट्रंप प्रशासन के लक्ष्यों के मुताबिक है।

हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने साफ किया कि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी ‘रेड लाइन्स’ पर कोई समझौता नहीं करेगा और आधिकारिक घोषणा तभी होगी जब देश के बड़े अधिकारी इसे मंजूरी देंगे। इस समझौते पर हस्ताक्षर के लिए यूरोप को एक न्यूट्रल जगह के तौर पर देखा जा रहा है।