अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़े समझौते की चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि समझौता लगभग पूरा हो चुका है, जिसकी वजह से उन्होंने ईरान पर होने वाले हमलों को रोक दिया है। हालांकि, ईरान की तरफ से इस खबर को लेकर अलग बातें कही जा रही हैं और तनाव अब भी बना हुआ है।

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डोनाल्ड ट्रंप का दावा और क्षेत्रीय सहमति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान के साथ एक समझौता लगभग तय हो गया है। उन्होंने बताया कि इस डील के मुख्य बिंदुओं पर अमेरिका के साथ-साथ इसराइल, सऊदी अरब, यूएई, कतर, तुर्की, पाकिस्तान, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और मिस्र जैसे देशों की सहमति मिल गई है। इसी वजह से उन्होंने ईरान पर होने वाली बमबारी और सैन्य हमलों को कैंसिल कर दिया है। हालांकि, ट्रंप ने यह भी साफ़ किया कि जब तक यह लेनदेन पूरी तरह फाइनल नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी जारी रहेगी।

ईरान के विदेश मंत्रालय की अलग राय

दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाएई ने कहा कि समझौते के टेक्स्ट का एक बड़ा हिस्सा तैयार है, लेकिन अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपनी लाल रेखाओं यानी बुनियादी शर्तों से समझौता नहीं करेगा। इसके अलावा, ईरान की फार्स और मेहर न्यूज़ एजेंसी ने भी उन खबरों को गलत बताया है जिनमें कहा गया था कि शुरुआती समझौता ज्ञापन (MoU) के टेक्स्ट को मंजूरी मिल गई है। ईरान का कहना है कि अमेरिका बातचीत के दौरान अपनी बातें बार-बार बदल रहा है।

सैन्य तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति

समझौते की खबरों के बीच सैन्य गतिविधियां जारी रहीं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के हालिया हमलों ने अप्रैल में हुए युद्धविराम को बेकार कर दिया है। जवाब में ईरान ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। साथ ही, ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सभी जहाजों के लिए बंद करने का ऐलान किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ सकता है।

अगले हफ्ते हो सकता है साइन

सीबीएस न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच अगले हफ्ते एक ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ या समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो इसके बाद 60 दिनों की विस्तृत बातचीत शुरू होगी। इस प्रक्रिया में निम्नलिखित बातें शामिल हो सकती हैं:

  • समुद्र से बारूद हटाकर व्यापार के रास्ते खोलना।
  • ईरान द्वारा 15 से 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन पर रोक लगाना।
  • परमाणु साइटों को खत्म करने के बदले वित्तीय राहत देना।

वर्तमान में सबसे बड़ा विवाद ईरान के जमा पैसों को वापस करने पर है। ईरान 6 अरब से 12 अरब डॉलर की मांग कर रहा है, जबकि अमेरिका इसे किश्तों में और केवल मानवीय सामानों के लिए देने के पक्ष में है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com