ईरान के विदेश मंत्री ने हाल ही में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि जून के बीच में अमेरिका के साथ जो समझौता हुआ था, उसे ईरान के भीतर ही आपसी सहमति नहीं मिल पाई। इसी कारण यह समझौता फेल हो गया। इस घटना के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच फिर से तनाव बढ़ गया है और दोनों देशों के बीच सैन्य हमले भी देखे गए हैं।
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समझौते के टूटने की मुख्य वजह
ईरान सरकार का कहना है कि उन्होंने समझौते के किसी भी नियम या शर्त के साथ समझौता नहीं किया था। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 20 जुलाई को साफ किया कि देश के हित और सिद्धांतों पर कोई आंच नहीं आने दी गई। वहीं, 19 जुलाई को ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उन्होंने समझौते का उल्लंघन किया है।
तेहरान का आरोप है कि अमेरिका ने नए प्रतिबंध लगाए हैं और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रबंधन में दखल दिया है, जो समझौते की Article 5 का हिस्सा था। इसके चलते ईरान ने समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को रोक दिया है।
अब क्या है स्थिति
वर्तमान में दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी तरह से बंद है। ईरान के अधिकारियों का कहना है कि अब कोई नई बातचीत नहीं हो रही है। पूरा ध्यान अब सुरक्षा और रक्षा व्यवस्था पर केंद्रित किया गया है। दोनों पक्षों के बीच भरोसे की भारी कमी देखी जा रही है, जिससे फिलहाल किसी नए समझौते की उम्मीद कम नजर आती है।
