ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. ईरान ने अपनी बिगड़ती आर्थिक स्थिति के कारण फिर से बातचीत करने की इच्छा जताई है. इसके लिए ईरान ने पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाया है और अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है. अब पूरी दुनिया की नज़र इस बात पर है कि क्या अमेरिका इस प्रस्ताव को स्वीकार करेगा.

ईरान ने अमेरिका को क्या प्रस्ताव भेजा और क्यों?

ईरान ने 30 अप्रैल 2026 की शाम को पाकिस्तान को अपना नया ड्राफ्ट प्रस्ताव सौंपा, जिसे 1 मई को अमेरिकी अधिकारियों तक पहुँचाया गया. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने इस खबर की पुष्टि की है. ईरान के न्यायपालिका प्रमुख গোলামहोसैन मोहसेनी एजेई ने बताया कि ईरान बातचीत से कभी पीछे नहीं हटा, लेकिन वह किसी भी तरह के दबाव या थोपे गए नियमों को स्वीकार नहीं करेगा.

  • ईरान ने शांति समझौते के लिए 10 सूत्रीय योजना का प्रस्ताव रखा है.
  • ईरान की मांग है कि अमेरिका उसके बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी (naval blockade) तुरंत हटाए.
  • ईरान ने यह भी साफ किया कि जब तक लेबनान पर हमलों को रोकने की शर्त शामिल नहीं होगी, वह बातचीत में शामिल नहीं होगा.

अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप का इस पर क्या कहना है?

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के इस नए प्रस्ताव पर अपनी नाखुशी जताई है. उन्होंने कहा कि वह इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं. ट्रंप का मानना है कि ईरान इसलिए डील करना चाहता है क्योंकि उसकी सैन्य ताकत अब लगभग खत्म हो चुकी है. ट्रंप ने कहा कि उनके पास या तो ईरान को पूरी तरह खत्म करने का विकल्प है या फिर एक डील करने का.

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने स्पष्ट किया कि अमेरिका कभी भी ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा. अमेरिका ने ईरानी विदेशी मुद्रा विनिमय फर्मों पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं और चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने के लिए कोई ‘टोल’ नहीं दिया जाएगा.

बातचीत में पाकिस्तान की क्या भूमिका है?

पाकिस्तान इस पूरे विवाद में अमेरिका और ईरान के बीच एक पुल का काम कर रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने कहा है कि उनका देश क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. पाकिस्तानी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उन्होंने ईरान के संशोधित प्रस्ताव को अमेरिका तक पहुँचा दिया है.

इस पूरे मामले में अन्य देशों की भी नज़र है. UAE के एक वरिष्ठ अधिकारी ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान पर गहरा अविश्वास जताया है. वहीं, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने अमेरिकी नाकाबंदी को चुनौती देते हुए कहा कि इतने बड़े बॉर्डर वाले देश की नाकाबंदी करना आसान नहीं है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव कब शुरू हुआ था?

ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य ऑपरेशन ‘Epic Fury’ 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जिसके बाद तनाव और बढ़ गया था.

ईरान ने बातचीत के लिए क्या मुख्य शर्तें रखी हैं?

ईरान ने अपनी शर्तों में अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी को हटाने और लेबनान पर हमलों को रोकने की मांग की है.

अमेरिका की मुख्य मांग क्या है?

अमेरिका का कहना है कि कोई भी डील तभी संभव होगी जब ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश पूरी तरह बंद कर देगा.

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.