अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर स्विट्जरलैंड के Lake Lucerne Summit में हुई हाई-लेवल बातचीत सोमवार, 22 जून 2026 को खत्म हो गई. इस मीटिंग में कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और दोनों देशों के बीच जमी बर्फ को पिघलाने की कोशिश की. अब एक रोडमैप तैयार किया गया है जिसके तहत अगले 60 दिनों के भीतर एक आखिरी समझौते पर सहमति बन सकती है.
आर्थिक मदद और संपत्तियों की वापसी
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi ने बताया कि ईरान को तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात के लिए छूट मिली है. साथ ही, देश की जमी हुई संपत्तियों (frozen assets) को वापस करने और आर्थिक नाकेबंदी हटाने पर भी बात हुई है. ईरान ने अपने देश के विकास के लिए एक नया पुनर्निर्माण प्लान भी शुरू करने का ऐलान किया है. हालांकि, परमाणु बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ईरान ने इन आर्थिक फायदों का मिलना जरूरी बताया है.
मध्यस्थता और नए वर्किंग ग्रुप
कतर और पाकिस्तान ने एक साझा बयान में कहा कि बातचीत में काफी अच्छी प्रगति हुई है. परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और विवादों को सुलझाने के लिए विशेष वर्किंग ग्रुप बनाए गए हैं. इन ग्रुप्स की निगरानी के लिए एक हाई-लेवल कमेटी भी गठित की गई है ताकि राजनीतिक स्तर पर बातचीत सही दिशा में चलती रहे. इस पूरी प्रक्रिया में IAEA के डायरेक्टर जनरल Rafael Grossi भी मौजूद रहे.
सुरक्षा और सैन्य स्थिति
दोनों देशों ने गलतफहमियों को रोकने के लिए बातचीत का एक सीधा जरिया बनाया है, ताकि Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा बनी रहे. इसके अलावा, Lebanon के लिए एक ‘डी-कन्फ्लिक्शन सेल’ भी बनाया गया है. दूसरी तरफ, अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल मध्य पूर्व (Middle East) में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखेगा. अमेरिकी सेना की कटौती तभी होगी जब ईरान समझौते की सभी शर्तों को पूरी तरह मानेगा.
प्रमुख शामिल लोग
- ईरान: राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian, विदेश मंत्री Abbas Araqchi और स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf.
- अमेरिका: राष्ट्रपति Donald Trump, उपराष्ट्रपति JD Vance, Jared Kushner और Steve Witkoff.
- मध्यस्थ: कतर और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और विदेश मंत्री.
