अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी अब खत्म हो सकती है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों ने शांति समझौते के एक ढांचे पर सहमति जताई है। सबसे खास बात यह है कि इस समझौते पर हस्ताक्षर किसी दफ्तर में नहीं बल्कि ऑनलाइन तरीके से किए जाएंगे।

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क्या है यह समझौता और इसकी शर्तें

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने 13 जून 2026 को बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व के संघर्ष को खत्म करने के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार हो गया है। यह कोई अंतिम संधि नहीं बल्कि एक ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MOU) है। इसका मकसद फिलहाल तनाव को कम करना और आगे की बातचीत का रास्ता खोलना है।

इस समझौते में कुछ मुख्य बातें शामिल हैं:

  • अमेरिका ईरान की जमी हुई संपत्ति को वापस करेगा।
  • ईरानी तेल के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को हटाया जाएगा।
  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सभी के लिए फिर से खोला जाएगा।

हस्ताक्षर की तारीख को लेकर असमंजस

समझौते पर साइन कब होंगे, इसे लेकर अलग-अलग बयान सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने Truth Social पर कहा कि यह हस्ताक्षर रविवार, 14 जून 2026 को होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि साइन होते ही होर्मुज़ जलडमरूमध्य को तुरंत खोल दिया जाएगा।

वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Ismail Baqaei ने इस बात से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि रविवार को साइन नहीं होंगे, लेकिन आने वाले दिनों में इसकी संभावना है। उन्होंने कहा कि दूसरे पक्ष की हिचकिचाहट की वजह से समय तय करने में सावधानी बरतनी चाहिए।

पाकिस्तान और कतर की भूमिका

इस पूरी डील में पाकिस्तान ने एक मुख्य मध्यस्थ के रूप में काम किया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने Al Jazeera को बताया कि इस्लामाबाद वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए इस ऑनलाइन साइनिंग इवेंट की मेजबानी करेगा।

कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman bin Jassim Al Thani ने भी प्रधानमंत्री शरीफ से फोन पर बात की। उन्होंने इस प्रगति पर संतोष जताया और उम्मीद जताई कि अमेरिका और ईरान जल्द ही इस पर हस्ताक्षर करेंगे।

कौन करेंगे साइन और कौन हैं शामिल

खबरों के मुताबिक, इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति J.D. Vance और ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष Mohammad Baqer Qalibaf के नाम सामने आ रहे हैं।

इस डिप्लोमैटिक कोशिश में अमेरिका की तरफ से विदेश मंत्री Marco Rubio, रक्षा मंत्री Pete Hegseth, Jared Kushner और व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ Susie Wiles जैसे बड़े अधिकारी शामिल रहे हैं।