Iran-USA Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच हो सकता है समझौता, पाकिस्तान और मिस्र की मध्यस्थता से बढ़ी उम्मीद

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को खत्म करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलअती ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच शांति समझौता हो सकता है। इस पूरे मामले में पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश बीच-बचाव कर रहे हैं ताकि दुनिया भर में युद्ध का असर कम हो सके।

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शांति समझौते के लिए अब तक क्या-क्या हुआ

दोनों देशों के बीच बातचीत के कई दौर चले हैं, जिनमें से कुछ सफल रहे और कुछ विफल। अब तक की मुख्य घटनाओं की जानकारी नीचे दी गई तालिका में है:

तारीख घटना/बयान
25 मार्च 2026 ईरान ने अमेरिका के 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को खारिज किया
8 अप्रैल 2026 दोनों देशों के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बनी, जिसे ‘इस्लामाबाद समझौता’ कहा गया
11-12 अप्रैल 2026 इस्लामाबाद में 21 घंटे चली पहली शांति वार्ता विफल रही
12 अप्रैल 2026 अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने वार्ता विफल होने की पुष्टि की
17 अप्रैल 2026 ईरान ने लेबनान और लाल सागर में स्थायी युद्धविराम की मांग की
18 अप्रैल 2026 राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समझौते की उम्मीद जताई
21 अप्रैल 2026 इस्लामाबाद में दूसरे दौर की वार्ता होने की उम्मीद है

समझौते में आने वाली मुख्य रुकावटें क्या हैं

शांति समझौते की राह में कुछ ऐसी शर्तें हैं जिन पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है:

  • ईरान की मांग: ईरान चाहता है कि उसकी जब्त की गई संपत्तियां वापस मिलें और लेबनान में पूरी तरह युद्धविराम हो।
  • अमेरिका की शर्त: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करे, जिस पर ईरान तैयार नहीं है।
  • स्थायी समाधान: ईरान किसी भी अस्थायी युद्धविराम के बजाय पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति चाहता है और इसे अपनी रेड लाइन बता रहा है।

मध्यस्थ देशों की क्या भूमिका है

इस विवाद को सुलझाने में पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की अहम भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने ईरान का दौरा कर बातचीत फिर से शुरू करने की कोशिश की है। वहीं, तुर्की खुद को वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक पुल के रूप में स्थापित कर रहा है ताकि युद्धविराम को बढ़ाया जा सके और बातचीत की गति बनी रहे।