ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान एक बड़े मध्यस्थ के रूप में सामने आया है. हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत की. हालांकि, अमेरिका के साथ शांति वार्ता के दूसरे दौर को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है और ईरान इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं ले पाया है.

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ईरान क्यों नहीं चाहता दूसरे दौर की वार्ता?

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर विश्वास तोड़ने और संघर्ष विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है. उन्होंने मार्च और जून 2025 की घटनाओं का जिक्र किया, जब बातचीत के बावजूद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी. ईरान का मानना है कि अमेरिका की मांगें अस्पष्ट और विरोधाभासी हैं, जिसकी वजह से कूटनीति सही तरीके से नहीं चल पा रही है.

  • ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दी कि तनाव बढ़ने पर ईरान युद्ध के मैदान में नए पत्ते खोल सकता है.
  • ईरान ने अमेरिका पर इस्लामाबाद वार्ता को आत्मसमर्पण की मेज बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है.
  • अराघची ने कहा कि अमेरिका की उकसाने वाली कार्रवाइयां शांति वार्ता में सबसे बड़ी बाधा हैं.

पाकिस्तान की भूमिका और डोनाल्ड ट्रंप का दावा

पाकिस्तान इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए काफी कोशिशें कर रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अप्रैल, 2026 को संकेत दिया था कि शांति वार्ता का दूसरा दौर अगले 36 से 72 घंटों के भीतर इस्लामाबाद में हो सकता है. ट्रंप का कहना है कि अमेरिका इस संघर्ष में बढ़त बनाए हुए है और समझौता होने के बाद ही होर्मुज से अमेरिकी नौसेना अपनी नाकेबंदी हटाएगी.

वहीं, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने डोनाल्ड ट्रंप से होर्मुज नाकेबंदी पर चर्चा की और बताया कि यह नाकेबंदी ही वार्ता में सबसे बड़ी रुकावट है. बता दें कि 11 अप्रैल, 2026 को इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच पहली लंबी बैठक हुई थी.

अफगानिस्तान प्रस्ताव और पाकिस्तान में जन असंतोष

एक तरफ जहाँ अमेरिका के साथ बात नहीं बन पा रही, वहीं ईरान के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान को अफगानिस्तान के साथ तनाव कम करने में मदद की पेशकश की है. यह प्रस्ताव 23 अप्रैल, 2026 को दिया गया था. लेकिन पाकिस्तान के अंदर ही सरकार के इन मध्यस्थता प्रयासों को लेकर जनता में नाराजगी देखी गई है.

पाकिस्तान के नागरिकों का सवाल है कि जब ईरान खुद बातचीत के लिए तैयार नहीं है, तो सरकार को इसमें दखल देने की क्या जरूरत है. वर्तमान में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि ने भी पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली भूमिका को स्वीकार नहीं किया है.

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.