ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलने के लिए बातचीत चल रही है, लेकिन लेबनान पर जारी इजरायली हमलों ने इस प्रक्रिया को मुश्किल बना दिया है। इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है जिससे माहौल और गरमा गया है।

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इस्लामाबाद में बातचीत और ईरान की शर्तें

11 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दूसरे दौर की वार्ता शुरू हुई। ईरान ने बातचीत जारी रखने के लिए एक बड़ी शर्त रखी है कि बेरूत (लेबनान) पर हमले पूरी तरह से बंद किए जाएं। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे, तो वह बातचीत रद्द कर सकता है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मोहम्मद गालिबफ कर रहे हैं, जिन्होंने कहा कि ईरान सद्भावना के साथ आया है लेकिन उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है।

डोनाल्ड ट्रंप और जेडी वेंस की चेतावनी

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलता और परमाणु हथियार न रखने का वादा नहीं करता, तो गोलीबारी शुरू हो जाएगी। ट्रंप ने चेतावनी दी कि बातचीत विफल होने पर ईरान को दर्दनाक चोट दी जाएगी। दूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने इस्लामाबाद पहुंचकर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की और ईरान को चेतावनी दी कि वह वाशिंगटन के साथ खेलने की कोशिश न करे।

प्रमुख अधिकारियों के बयान और मुख्य मुद्दे

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने अमेरिकी बयानबाजी की कड़ी निंदा की और आरोप लगाया कि यह भाषा ईरानी वार्ताकारों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देती है। प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ़ ने कहा कि समझौता तभी संभव है जब अमेरिका इजरायल के बजाय अपने हितों पर ध्यान दे। वहीं, अमेरिका ईरान के जमे हुए धन को जारी करने पर सहमत हो गया है।

नाम/अधिकारी मुख्य बयान/भूमिका
Esmaeil Baqaei अमेरिकी बयानबाजी की निंदा की और इसे हिंसा बढ़ाने वाला बताया
JD Vance ईरान को वाशिंगटन के साथ ईमानदारी से बात करने की चेतावनी दी
Mohammad Ghalibaf ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और अमेरिका पर अविश्वास जताया
Abbas Araghchi लेबनान पर इजरायली हमलों की निंदा की और इसे समझौते का हिस्सा बताया
Shehbaz Sharif उम्मीद जताई कि बातचीत क्षेत्र में स्थायी शांति लाएगी