ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. ईरान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि अमेरिका अब इस जंग से अपनी इज्जत बचाकर निकलने का रास्ता ढूंढ रहा है. यह सब उस समय हो रहा है जब अमेरिका के खास दूत शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान जा रहे हैं, लेकिन ईरान ने सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है.
पाकिस्तान में शांति वार्ता और अमेरिका का क्या है प्लान?
व्हाइट हाउस ने घोषणा की कि अमेरिकी विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद जा रहे हैं. अमेरिकी सरकार चाहती है कि पाकिस्तानी मध्यस्थता के जरिए ईरान के साथ बात हो सके. वहीं, अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान समझौता नहीं करता है, तो अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के दबाव में ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ढह जाएगी.
ईरान का रुख और होर्मुज स्ट्रेट का विवाद
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi इस्लामाबाद तो पहुंचे, लेकिन ईरान ने साफ कर दिया कि अमेरिकी दूतों के साथ उनकी कोई सीधी बैठक नहीं होगी. ईरान की बातें केवल पाकिस्तानी अधिकारियों के जरिए पहुंचाई जाएंगी. इसके साथ ही, ईरान ने 18 अप्रैल को होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया और अमेरिकी नाकेबंदी को समुद्री डकैती करार दिया.
ईरान की सैन्य ताकत और क्षेत्रीय हालात
ईरान के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसकी सैन्य क्षमता बरकरार है और उसके शिकारी ड्रोन व मिसाइल लॉन्चर पूरी तरह सक्रिय हैं. इस बीच, इजरायल लेबनान में हवाई हमले कर रहा है और हिजबुल्लाह ने युद्धविराम के विस्तार को खारिज कर दिया है. ईरान ने राष्ट्रपति ट्रंप के युद्धविराम प्रयासों को धोखा बताया और कहा कि अमेरिका सिर्फ अपनी सैन्य ताकत को दोबारा जुटाने की कोशिश कर रहा है.