Iran Port Blockade: ईरान के पोर्ट्स पर अमेरिकी नाकाबंदी जारी, बातचीत के लिए ईरान ने रखी बड़ी शर्त
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी को लेकर दोनों देशों के बीच अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। जहाँ एक तरफ ईरान ने बातचीत के संकेत दिए हैं, वहीं अमेरिका ने साफ़ कर दिया है कि वह अपनी पाबंदियां जारी रखेगा। इस पूरे मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है।
अमेरिका ने पोर्ट्स की नाकाबंदी को लेकर क्या कहा?
अमेरिकी खज़ाना मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 22 अप्रैल 2026 को साफ़ किया कि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि ईरान की तेल आधारित अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए वित्तीय दबाव और बढ़ाया जाएगा। बेसेंट ने यह चेतावनी भी दी कि जो भी व्यक्ति या जहाज़ ईरान के व्यापारिक नेटवर्क की मदद करेंगे, उन पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इससे पहले 21 अप्रैल को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान की मांग पर युद्धविराम तो बढ़ा दिया था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना नाकाबंदी जारी रखेगी।
ईरान ने बातचीत के लिए क्या शर्त रखी है?
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरवानी ने 22 अप्रैल 2026 को कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत तभी शुरू होगी जब बंदरगाहों से नाकाबंदी हटाई जाएगी। ईरान का मानना है कि 13 अप्रैल 2026 से लागू की गई यह नाकाबंदी उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने 20 अप्रैल को इस कार्रवाई को एक हमला और युद्ध अपराध करार दिया था। ईरान का कहना है कि यह नाकाबंदी युद्धविराम के नियमों के खिलाफ है और जब तक वाशिंगटन अपना फैसला नहीं बदलता, बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।
क्या वाकई नाकाबंदी खत्म होने वाली है?
सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी खबरें आईं कि अमेरिका नाकाबंदी खत्म करने के लिए तैयार है, लेकिन आधिकारिक बयानों में इसकी पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका अब भी ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने की अपनी रणनीति पर टिका हुआ है। हाल ही में इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है और समुद्री रास्तों पर अमेरिकी सेना की पकड़ जारी है।