Iran USA Tension: ईरान ने दी रेड सी बंद करने की चेतावनी, अमेरिका ने चीन पर बनाया दबाव, पाकिस्तान में हो सकती है न्यूक्लियर डील
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुँच गया है. अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी है, जिसके जवाब में ईरान अब रेड सी और फारस की खाड़ी में व्यापार रोकने की धमकी दे रहा है. इस पूरी खींचतान के बीच पाकिस्तान दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है ताकि एक नया परमाणु समझौता हो सके.
ईरान और अमेरिका के बीच समुद्री टकराव की क्या है वजह?
अमेरिका ने 13 अप्रैल 2026 से ईरान के सभी बंदरगाहों पर समुद्री यातायात को पूरी तरह रोक दिया है. इस कदम के जवाब में ईरान के मिलिट्री कमांडर अली अब्दुल्लाही ने 15 और 16 अप्रैल को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने अपनी घेराबंदी जारी रखी, तो ईरान रेड सी, ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में व्यापार बंद कर देगा. ईरान का कहना है कि अमेरिका का यह कदम युद्ध विराम को तोड़ने जैसा है.
चीन और तेल के व्यापार पर अमेरिका ने क्या दबाव बनाया?
अमेरिका अब ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने की कोशिश कर रहा है. अमेरिकी खजाना विभाग ने 15 अप्रैल को तेल तस्करी से जुड़े 29 लोगों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह आर्थिक दबाव किसी बमबारी अभियान जैसा असर करेगा. अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान से तेल खरीदना बंद करे, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि चीन अब ईरान को हथियार नहीं देगा.
क्या पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच समझौता करा पाएगा?
पाकिस्तान इस समय एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने तेहरान जाकर अमेरिका का संदेश पहुँचाया है. दोनों देश परमाणु मुद्दे पर बातचीत तो करना चाहते हैं, लेकिन अभी तक सहमति नहीं बनी है. अमेरिका चाहता है कि ईरान 20 साल तक अपनी परमाणु गतिविधियां बंद रखे, जबकि ईरान केवल 3 से 5 साल के निलंबन पर राजी है.
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अमेरिकी नाकाबंदी की तारीख | 13 अप्रैल 2026 |
| ईरान की धमकी | रेड सी और फारस की खाड़ी को ब्लॉक करना |
| अमेरिकी प्रतिबंध | 29 लक्ष्य (कंपनियाँ और जहाज) |
| परमाणु निलंबन (USA मांग) | 20 साल |
| परमाणु निलंबन (ईरान प्रस्ताव) | 3 से 5 साल |
| युद्ध विराम की समाप्ति | 21 अप्रैल 2026 |
| मध्यस्थ देश | पाकिस्तान |