ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों से टोल टैक्स वसूलने की तैयारी में है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने साफ कह दिया है कि अगर ईरान ने ऐसा किया, तो दोनों देशों के बीच कोई भी शांति समझौता होना नामुमकिन होगा।

ईरान का टोल सिस्टम और नए नियम क्या हैं?

  • ईरान ने एक नई संस्था बनाई है जिसे Persian Gulf Straits Authority (PGSA) कहा जा रहा है।
  • अब जहाजों को गुजरने के लिए इजाजत लेनी होगी और भारी टोल देना होगा।
  • कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर तक की फीस मांगी जा रही है।
  • यह पैसा चीनी युआन (Chinese Yuan) या बिटकॉइन (Bitcoin) में लिया जा रहा है।
  • रूस और चीन जैसे देशों को इस फीस में छूट दी गई है।
  • ईरान इस मामले में ओमान के साथ भी बातचीत कर रहा है ताकि इस सिस्टम को स्थायी बनाया जा सके।

अमेरिका और चीन ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इसे गैरकानूनी और दुनिया के लिए खतरनाक बताया है। उन्होंने कहा कि यह शांति समझौते के रास्ते में एक बड़ी रुकावट है। राष्ट्रपति Donald Trump ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने ईरान को टोल दिया, तो उन पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे। वहीं चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने भी इस बात का विरोध किया है और कहा है कि इस रास्ते को खुला रखना जरूरी है ताकि ऊर्जा की सप्लाई न रुके।

अंतरराष्ट्रीय कानून और सुरक्षा पर क्या असर होगा?

अमेरिका का कहना है कि UNCLOS (United Nations Convention on the Law of the Sea) के नियमों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय रास्तों पर कोई टोल नहीं लगाया जा सकता। हालांकि ईरान ने इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इस बीच अमेरिका ने NATO के देशों के साथ मिलकर ‘Maritime Freedom Construct’ नाम की एक मुहिम शुरू की है ताकि ईरान पर राजनयिक और आर्थिक दबाव बनाया जा सके।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान जहाजों से कितना टोल वसूल रहा है?

ईरान की नई संस्था PGSA कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर तक की फीस ले रही है, जिसका भुगतान चीनी युआन या बिटकॉइन में करना होगा।

अमेरिका ने टोल चुकाने वाली कंपनियों को क्या चेतावनी दी है?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां ईरान को ट्रांजिट फीस देंगी, उन पर गंभीर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.