अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने ईरान के साथ बातचीत में बड़ी प्रगति का दावा किया है। उनका कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप इस पूरे इलाके में ‘स्थायी शांति’ लाना चाहते हैं, जो लंबे समय से विवादों में घिरा रहा है। स्विट्जरलैंड में हुई इस उच्च स्तरीय मीटिंग में लेबनान में चल रहे युद्ध को खत्म करने और परमाणु समझौतों पर गहराई से चर्चा हुई।
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इस पूरी प्रक्रिया के तहत अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता (MoU) साइन हुआ, जिसके बाद 18 जून 2026 से बातचीत के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया। इस समझौते में लेबनान में लड़ाई रोकने, वहां की संप्रभुता का सम्मान करने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखने जैसी शर्तें शामिल की गई हैं।
बातचीत के दौरान कुछ मुश्किलें भी आईं। 19 जून को लेबनान में इज़राइल और हिज़बुल्लाह के बीच भारी गोलाबारी हुई, जिसमें चार इज़राइली सैनिकों की मौत हो गई। इस तनाव की वजह से स्विट्जरलैंड में होने वाली मीटिंग को कुछ समय के लिए टालना पड़ा था। लेबनान और ईरान की मांग थी कि इज़राइल अपनी सेना को वहां से पूरी तरह हटा ले, लेकिन इज़राइल ने इस बात से इनकार कर दिया।
21 और 22 जून को कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में फिर से सीधी बातचीत शुरू हुई, जिसका नेतृत्व JD Vance ने किया। इस दौरान कुछ अहम फैसले लिए गए:
- ईरान ने परमाणु निगरानी के लिए IAEA के निरीक्षकों को दोबारा देश में आने की अनुमति दे दी है।
- लेबनान में युद्धविराम का सख्ती से पालन कराने के लिए ईरान, अमेरिका और लेबनान मिलकर एक ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाएंगे।
- ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने लेबनान युद्ध को रोकने और ईरान की जमी हुई संपत्ति को वापस पाने की दिशा में बड़ी प्रगति की बात कही है।
हालांकि, इस शांति प्रक्रिया के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी जारी की है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान को लेबनान में अपने समर्थकों (Proxies) को रोकना होगा, वरना उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा। वहीं, JD Vance ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि जहां इज़राइल की सुरक्षा जरूरी है, वहीं लेबनान की आजादी का भी सम्मान होना चाहिए।
