ईरान और अमेरिका के बीच माहौल एक बार फिर गरमा गया है। पाकिस्तान में होने वाली जरूरी बातचीत अचानक रद्द हो गई है और अब दोनों देशों के बीच टकराव की आशंका बढ़ गई है। ईरानी सेना ने साफ कहा है कि अगर अमेरिकी नौसेना ने अपनी नाकेबंदी जारी रखी, तो उन्हें इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

पाकिस्तान में बातचीत क्यों हुई रद्द और क्या है पूरा मामला?

25 अप्रैल, 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी। ट्रंप ने इसका कारण यह बताया कि इस यात्रा में बहुत समय बर्बाद हो रहा है और कोई खास तरक्की नहीं दिख रही। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका के पास बातचीत के सभी कार्ड मौजूद हैं।

  • ईरानी विदेश मंत्री का रुख: विदेश मंत्री अब्बास अराघची बिना किसी बातचीत के इस्लामाबाद से वापस लौट गए। उन्होंने वहां पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात की थी।
  • बातचीत की स्थिति: दोनों देशों के बीच राजनयिक रास्ते अब और मुश्किल नजर आ रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में क्या हो रहा है?

अमेरिका ने 13 अप्रैल, 2026 से ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी कर रखी है। ईरान इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और आक्रामकता का काम मान रहा है। ईरानी संयुक्त सैन्य कमान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने अपनी सैन्य कार्रवाइयों को बंद नहीं किया, तो ईरान को आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।

इस नाकेबंदी की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग शून्य हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब इस स्थिति का फायदा उठाकर गुजरने वाले जहाजों से टोल भुगतान वसूल रहा है।

क्या अब युद्धविराम (Ceasefire) खत्म हो जाएगा?

पाकिस्तान की मध्यस्थता से 8 अप्रैल, 2026 को दो हफ्ते का युद्धविराम शुरू हुआ था, जिसे बाद में 21 अप्रैल को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया गया था। लेकिन अब सैन्य धमकियों और बातचीत रद्द होने से यह समझौता खतरे में है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान किसी भी दबाव, धमकी या घेराबंदी के तहत बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिकी समुद्री प्रतिबंधों की निंदा करते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया है।